संक्षेप रामायण – श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

ततो हनूमान् गत्वाशु हिमवन्तं महागिरिम् । औषधं सञ्जीवनीयमानीय प्राणमापयत् ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् हनुमान् शीघ्र हिमालय पर्वत पर जाकर संजीवनी औषधि लाए और (लक्ष्मण को) पुनः प्राणवान् किया।

अर्थ / व्याख्या

हनुमान् ने हिमालय से संजीवनी लाकर लक्ष्मण को पुनर्जीवित किया।

टिप्पणी

यह श्लोक हनुमान् के अद्भुत पराक्रम और रामभक्ति का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ४६ – हनुमान् का संजीवनी लाना ॥

ततो हनूमान् गत्वाशु हिमवन्तं महागिरिम् । औषधं सञ्जीवनीयमानीय प्राणमापयत् ॥
tato hanūmān gatvāśu himavantaṃ mahāgirim | auṣadhaṃ sañjīvanīyamānīya prāṇamāpayat ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् हनुमान् शीघ्र हिमालय पर्वत पर जाकर संजीवनी औषधि लाए और (लक्ष्मण को) पुनः प्राणवान् किया।

🔹 English Translation : Then Hanuman quickly went to the great mountain Himavan, brought the Sanjivani herb, and restored Lakshmana to life.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ततःअव्ययतत्पश्चात्
हनूमान्पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनहनुमान्
गत्वाल्यबन्त अव्यय (गम् धातु)जाकर
आशुअव्ययशीघ्र
हिमवन्तम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनहिमालय को
महागिरिम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन (महा + गिरि)महान् पर्वत
औषधम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनऔषधि
सञ्जीवनीयम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनसंजीवनी (जीवनदायिनी)
आनीयल्यबन्त अव्यय (आ + नी)लाकर
प्राणमापयत्णिजन्त लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्राण + आप् + णिच्)प्राणवान् किया (जीवित किया)

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

जब इन्द्रजित की शक्ति से लक्ष्मण मूर्छित हो गए और वैद्य सुषेण ने कहा कि उन्हें संजीवनी बूटी की आवश्यकता है, तब हनुमान् ने उसे लाने का बीड़ा उठाया। वे समुद्र को लाँघकर हिमालय पहुँचे, किन्तु बूटी पहचान न सके। अतः वे पूरे पर्वत को ही उठाकर लंका ले आए। जाम्बवान् ने बूटी की पहचान की और उसके प्रयोग से लक्ष्मण स्वस्थ हो गए। यह घटना हनुमान् की असीम शक्ति, बुद्धि और राम के प्रति प्रेम को दर्शाती है।

यह घटना भारतीय संस्कृति में अत्यन्त लोकप्रिय है। "संजीवनी" शब्द जीवनदायिनी औषधि का पर्याय बन गया। हनुमान् का यह कार्य उनकी भक्ति और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, संजीवनी बूटी ज्ञान या भक्ति का प्रतीक है, जो मूर्छित आत्मा (लक्ष्मण) को पुनर्जीवित करती है। हनुमान् गुरु या साधक के प्रतीक हैं जो यह ज्ञान लाते हैं।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से आरोग्य, शक्ति और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। यह विशेष रूप से रोगियों और दुर्बल व्यक्तियों के लिए लाभदायक है।

॥ संजीवनीं हनूमान् यः प्राणदा लक्ष्मणाय वै ॥

जय श्री राम 🙏