संक्षेप रामायण – श्लोक 47

संस्कृत श्लोक

ततो रावणसंग्रामे रामः सत्यपराक्रमः । रावणं सगणं हत्वा यशः प्राप महत्पुनः ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् रावण के साथ युद्ध में सत्यपराक्रमी राम ने रावण को उसके गणों (सेना) सहित मारकर पुनः महान् यश प्राप्त किया।

अर्थ / व्याख्या

राम ने रावण और उसकी सेना का वध करके महान यश प्राप्त किया।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण की पराकाष्ठा – रावण वध का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ४७ – रावण वध ॥

ततो रावणसंग्रामे रामः सत्यपराक्रमः । रावणं सगणं हत्वा यशः प्राप महत्पुनः ॥
tato rāvaṇasaṃgrāme rāmaḥ satyaparākramaḥ | rāvaṇaṃ sagaṇaṃ hatvā yaśaḥ prāpa mahatpunaḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् रावण के साथ युद्ध में सत्यपराक्रमी राम ने रावण को उसके गणों (सेना) सहित मारकर पुनः महान् यश प्राप्त किया।

🔹 English Translation : Then in the battle with Ravana, Rama of true prowess, having slain Ravana along with his hosts, attained great fame again.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ततःअव्ययतत्पश्चात्
रावणसंग्रामेपुल्लिंग, सप्तमी एकवचन (रावण + संग्राम)रावण के साथ युद्ध में
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
सत्यपराक्रमःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (सत्य + पराक्रम)सत्य पराक्रम वाले (जिनका पराक्रम सत्य पर आधारित है)
रावणम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनरावण को
सगणम्विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन (स + गण)गणों (सेना) सहित
हत्वाल्यबन्त अव्यय (हन् धातु)मारकर
यशःनपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनयश
प्रापलिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + आप्)प्राप्त किया
महत्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनमहान्
पुनःअव्ययपुनः

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

राम और रावण के बीच अन्तिम युद्ध अत्यन्त भीषण था। रावण के पास अनेक दिव्य अस्त्र थे और वह मायावी भी था। राम ने उसे पराजित करने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। युद्ध के दौरान राम ने रावण के सिर काटे, किन्तु वे बार-बार जुड़ गए। तब विभीषण ने बताया कि रावण के नाभि में अमृत है, इसलिए उसे बाण से मारना होगा। राम ने ब्रह्मास्त्र से उसके नाभि पर प्रहार किया और रावण मारा गया।

रावण वध के साथ ही अधर्म का अन्त हुआ और धर्म की पुनर्स्थापना हुई। देवताओं ने पुष्पवर्षा की। राम की विजय ने उन्हें अमर कीर्ति दिलाई। राम को "सत्यपराक्रमः" कहा गया है – जिनका पराक्रम सत्य पर आधारित है। राम सदा सत्य पर चले, यहाँ तक कि वनवास भी स्वीकार किया। उनकी यही सत्यनिष्ठा उनकी विजय का कारण बनी।

आध्यात्मिक दृष्टि से, रावण अहंकार और काम का प्रतीक है। उसका वध आत्मा (राम) द्वारा अहंकार पर विजय को दर्शाता है।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से विजय, यश और सत्य की प्राप्ति होती है। यह उन लोगों के लिए विशेष लाभदायक है जो किसी कठिन परिस्थिति में सफलता चाहते हैं।

॥ रावणो निहतः श्रीमान् रामेण विदितात्मना ॥

जय श्री राम 🙏