संक्षेप रामायण – श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

ततो विभीषणं राज्ये लङ्कायाः स्थापयत्प्रभुः । रामो दाशरथिः श्रीमान् सुग्रीवादिभिरन्वितः ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् प्रभु श्रीमान् राम ने सुग्रीव आदि के साथ मिलकर विभीषण को लंका के राज्य पर स्थापित किया।

अर्थ / व्याख्या

राम ने विभीषण को लंका का राजा बनाया।

टिप्पणी

यह श्लोक राम के धर्मनिष्ठ मित्र विभीषण के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

॥ श्लोक ४८ – विभीषण का राज्याभिषेक ॥

ततो विभीषणं राज्ये लङ्कायाः स्थापयत्प्रभुः । रामो दाशरथिः श्रीमान् सुग्रीवादिभिरन्वितः ॥
tato vibhīṣaṇaṃ rājye laṅkāyāḥ sthāpayatprabhuḥ | rāmo dāśarathiḥ śrīmān sugrīvādibhiranvitaḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् प्रभु श्रीमान् राम ने सुग्रीव आदि के साथ मिलकर विभीषण को लंका के राज्य पर स्थापित किया।

🔹 English Translation : Then the glorious Lord Rama, the son of Dasharatha, along with Sugriva and others, established Vibhishana on the throne of Lanka.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ततःअव्ययतत्पश्चात्
विभीषणम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनविभीषण को
राज्येनपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचनराज्य पर
लङ्कायाःस्त्रीलिंग, षष्ठी एकवचनलंका के
स्थापयत्लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (स्था + णिच्)स्थापित किया
प्रभुःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनप्रभु
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
दाशरथिःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनदशरथ के पुत्र
श्रीमान्विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनश्रीमान्
सुग्रीवादिभिःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचन (सुग्रीव + आदि)सुग्रीव आदि के साथ
अन्वितःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनयुक्त

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

विभीषण रावण का छोटा भाई था, जिसने राम का साथ दिया था। उसने राम को रावण की कमजोरियाँ बताईं और युद्ध में सहायता की। राम ने उसे राज्य का वचन दिया था। रावण के वध के बाद राम ने विभीषण का राज्याभिषेक किया। यह घटना राम की धर्मनिष्ठा और कृतज्ञता को दर्शाती है। राम ने अपने वचन का पालन किया और एक राक्षस को भी राजा बनाकर उसे सम्मान दिया।

विभीषण का राज्याभिषेक यह सिखाता है कि धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति किसी भी कुल में जन्मा हो, वह सम्मान का पात्र होता है। विभीषण आज भी निष्ठा और धर्म के प्रतीक माने जाते हैं।

राम का "दाशरथिः" कहलाना उनके पिता दशरथ के प्रति सम्मान को दर्शाता है। वे स्वयं को सदा दशरथ पुत्र के रूप में पहचानते थे।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से न्यायप्रियता और वचनबद्धता की भावना जाग्रत होती है। यह उन लोगों के लिए विशेष लाभदायक है जो प्रशासन या नेतृत्व के पद पर हैं।

॥ धर्मेण स्थापितो राज्ये विभीषणो महायशाः ॥

जय श्री राम 🙏