संक्षेप रामायण – श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

सीतां पुनरवाप्याथ रामो राजीवलोचनः । तस्याश्चाग्निपरीक्षां वै चकार स महामतिः ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् राजीवलोचन राम ने सीता को पुनः प्राप्त करके उसकी अग्निपरीक्षा की, वे महामति थे।

अर्थ / व्याख्या

राम ने सीता की अग्निपरीक्षा ली।

टिप्पणी

यह श्लोक सीता की अग्निपरीक्षा का उल्लेख करता है, जो रामायण का विवादास्पद प्रसंग है।

॥ श्लोक ४९ – सीता की अग्निपरीक्षा ॥

सीतां पुनरवाप्याथ रामो राजीवलोचनः । तस्याश्चाग्निपरीक्षां वै चकार स महामतिः ॥
sītāṃ punaravāpyātha rāmo rājīvalocanaḥ | tasyāścāgniparīkṣāṃ vai cakāra sa mahāmatiḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् राजीवलोचन राम ने सीता को पुनः प्राप्त करके उसकी अग्निपरीक्षा की, वे महामति थे।

🔹 English Translation : Then, having regained Sita, Rama with lotus-like eyes, that great-minded one, subjected her to the fire ordeal.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
सीताम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनसीता को
पुनःअव्ययपुनः
अवाप्यल्यबन्त अव्यय (अव + आप्)प्राप्त करके
अथअव्ययतत्पश्चात्
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
राजीवलोचनःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराजीव (कमल) के समान नेत्रों वाले
तस्याःसर्वनाम, स्त्रीलिंग, षष्ठी एकवचनउसकी (सीता की)
अव्ययऔर
अग्निपरीक्षाम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनअग्निपरीक्षा
वैअव्ययही
चकारलिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (कृ धातु)की
सःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनउन्होंने
महामतिःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमहामति (महान् बुद्धि वाले)

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

रावण के वध के बाद राम ने सीता को बुलाया, किन्तु उनके सामने यह प्रश्न था कि जनता क्या कहेगी। सीता रावण के महल में रह चुकी थीं, यद्यपि वे सदा उनके मन से परे थीं। राम ने सीता से कहा कि उनकी प्रतिष्ठा के लिए उन्हें अग्निपरीक्षा देनी होगी। सीता ने अग्नि की शरण ली और अग्निदेव ने उन्हें अक्षत सिद्ध किया। यह घटना सीता की पवित्रता का प्रतीक बन गई।

यह प्रसंग रामायण के सबसे विवादास्पद प्रसंगों में से एक है। कुछ व्याख्याकार इसे सामाजिक मर्यादा का पालन मानते हैं, तो कुछ इसे राम के चरित्र पर एक धब्बा। वाल्मीकि ने इसे राम की महामति (महान बुद्धि) का परिणाम बताया है, क्योंकि वे एक आदर्श राजा थे और उन्हें प्रजा की चिंता थी।

आध्यात्मिक दृष्टि से, अग्निपरीक्षा आत्मा की शुद्धि का प्रतीक है। अग्नि साक्षी है, और सीता का अग्नि में प्रवेश करना यह दर्शाता है कि उनका तेज अग्नि से भी अधिक है। अन्ततः अग्निदेव ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से चरित्र की शुद्धि और सत्य के प्रति अटूट विश्वास की प्राप्ति होती है। यह उन लोगों के लिए लाभदायक है जो अपनी प्रतिष्ठा और साख को बनाए रखना चाहते हैं।

॥ अग्निना दर्शिता सीता पावकेन यशस्विनी ॥

जय श्री राम 🙏