संक्षेप रामायण – श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
ततो रावणसैन्यैश्च महायुद्धमवर्तत । रामस्य वानरैः सार्धं राक्षसैश्च सुदारुणम् ॥
हिंदी अनुवाद
तत्पश्चात् रावण की सेना और राम के वानरों तथा राक्षसों के बीच अत्यन्त भयंकर महायुद्ध हुआ।
अर्थ / व्याख्या
राम और रावण की सेनाओं के बीच भीषण युद्ध प्रारम्भ हुआ।
टिप्पणी
यह श्लोक लंकायुद्ध के प्रारम्भ का सूचक है।
॥ श्लोक ४३ – महायुद्ध का आरम्भ ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् रावण की सेना और राम के वानरों तथा राक्षसों के बीच अत्यन्त भयंकर महायुद्ध हुआ।
🔹 English Translation : Then a great and extremely fierce war took place between Ravana's forces and Rama's monkeys, along with the demons.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| ततः | अव्यय | तत्पश्चात् |
| रावणसैन्यैः | पुल्लिंग, तृतीया बहुवचन (रावण + सैन्य) | रावण की सेनाओं के साथ |
| च | अव्यय | और |
| महायुद्धम् | नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | महायुद्ध |
| अवर्तत | लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (वृत् धातु) | हुआ, प्रवर्तित हुआ |
| रामस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | राम के |
| वानरैः | पुल्लिंग, तृतीया बहुवचन | वानरों के साथ |
| सार्धम् | अव्यय | साथ |
| राक्षसैः | पुल्लिंग, तृतीया बहुवचन | राक्षसों के साथ |
| च | अव्यय | और |
| सुदारुणम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | अत्यन्त भयंकर |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
यह श्लोक लंकायुद्ध के प्रारम्भ का संकेत देता है, जो रामायण का सर्वाधिक रोमांचक भाग है। राम और रावण के बीच यह युद्ध धर्म और अधर्म के बीच का प्रतीक बन गया। रावण के पास अनेक शक्तिशाली योद्धा थे – कुम्भकर्ण, इन्द्रजित, प्रहस्त, अतिकाय आदि। राम की सेना में वानर वीर थे – हनुमान्, अंगद, नल, नील, जाम्बवान् आदि। युद्ध अनेक दिनों तक चला और इसमें अनेक पराक्रम देखने को मिले।
रामायण के युद्धकाण्ड में इस युद्ध का विस्तृत वर्णन है। इन्द्रजित ने कई बार राम-लक्ष्मण को नागपाश आदि से बाँधा, किन्तु हनुमान् और अन्य वानरों ने उनकी रक्षा की। कुम्भकर्ण ने युद्ध में हाहाकार मचाया, पर अन्ततः राम के हाथों मारा गया। युद्ध की समाप्ति रावण के वध के साथ हुई। यह युद्ध सिखाता है कि अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अन्ततः धर्म की ही विजय होती है।
आध्यात्मिक दृष्टि से, यह युद्ध आत्मा (राम) और अहंकार (रावण) के बीच संघर्ष का प्रतीक है। वानर सेनाएँ इन्द्रियाँ हैं और राक्षस विकार।
📖 पाठ की विधि एवं लाभ
इस श्लोक का पाठ करने से आन्तरिक शक्ति और साहस का संचार होता है। यह उन लोगों के लिए लाभदायक है जो किसी बड़े संघर्ष या प्रतियोगिता में हैं।
॥ धर्मयुद्धं हि तत्प्रोक्तं रामरावणयोर्महत् ॥
जय श्री राम 🙏