संक्षेप रामायण – श्लोक 42

संस्कृत श्लोक

ततो लङ्कां समासाद्य रामः सुग्रीवसंयुतः । अवरुध्य च तां लङ्कां न्यवसत्पर्वतोपमः ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् लंका में पहुँचकर राम ने सुग्रीव के साथ मिलकर उस लंका को घेर लिया और पर्वत के समान (अडिग) होकर निवास किया।

अर्थ / व्याख्या

राम और वानर सेना ने लंका को चारों ओर से घेर लिया और युद्ध की तैयारी की।

टिप्पणी

यह श्लोक राम के लंका पहुँचने और नगर को घेरने का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ४२ – लंका का घेराव ॥

ततो लङ्कां समासाद्य रामः सुग्रीवसंयुतः । अवरुध्य च तां लङ्कां न्यवसत्पर्वतोपमः ॥
tato laṅkāṃ samāsādya rāmaḥ sugrīvasaṃyutaḥ | avarudhya ca tāṃ laṅkāṃ nyavasatparvatopamaḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् लंका में पहुँचकर राम ने सुग्रीव के साथ मिलकर उस लंका को घेर लिया और पर्वत के समान (अडिग) होकर निवास किया।

🔹 English Translation : Then, having reached Lanka, Rama along with Sugriva besieged that Lanka and resided there, steadfast like a mountain.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ततःअव्ययतत्पश्चात्
लङ्काम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनलंका को
समासाद्यल्यबन्त अव्यय (सम् + आ + सद्)पहुँचकर
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
सुग्रीवसंयुतःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसुग्रीव के साथ संयुक्त
अवरुध्यल्यबन्त अव्यय (अव + रुध्)घेरकर
अव्ययऔर
ताम्सर्वनाम, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनउस
लङ्काम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनलंका को
न्यवसत्लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (नि + वस्)निवास किया
पर्वतोपमःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (पर्वत + उपम)पर्वत के समान (अडिग)

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

राम के नेतृत्व में वानर सेना ने लंका नगरी को चारों ओर से घेर लिया। यह घेराव अत्यन्त रणनीतिक था – समुद्र तट पर सेना डेरा डाले हुए थी, और लंका के सभी द्वारों को अवरुद्ध कर दिया गया था। राम स्वयं पर्वत के समान अडिग रहे, जिससे उनकी दृढ़ता का पता चलता है। इस घेराव के दौरान विभीषण राम की शरण में आए और उन्होंने राम को रावण की शक्तियों की जानकारी दी। राम ने विभीषण का राज्याभिषेक करने का वचन दिया और उन्हें अपने साथ रखा।

यह घेराव युद्ध की पूर्व तैयारी थी। राम ने अपनी सेना को सुव्यवस्थित किया और विभिन्न वानर वीरों को विभिन्न दिशाओं की जिम्मेदारी सौंपी। यहाँ "पर्वतोपमः" विशेषण राम की अडिगता और धैर्य को दर्शाता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, लंका का घेराव मन के चारों ओर साधना का घेरा बनाने के समान है, जिससे बुरे विचार (राक्षस) बाहर नहीं निकल पाते और अन्ततः पराजित होते हैं।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से संकल्पशक्ति और धैर्य की वृद्धि होती है। यह उन लोगों के लिए विशेष लाभदायक है जो किसी दीर्घकालिक परियोजना या लक्ष्य में लगे हुए हैं।

॥ अडिगः पर्वत इव रामः समरमूर्धनि ॥

जय श्री राम 🙏