संक्षेप रामायण – श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

ततो रामोऽभिषिक्तश्च लक्ष्मणेन सहानघः । राज्यं प्राप्य पुरीं रम्यामयोध्यां पुनरागतः ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् निष्पाप राम ने लक्ष्मण के साथ राज्य प्राप्त करके रम्य अयोध्या पुरी में अभिषिक्त होकर प्रवेश किया।

अर्थ / व्याख्या

राम का राज्याभिषेक और अयोध्या वापसी।

॥ श्लोक ५१ – राम का राज्याभिषेक ॥

ततो रामोऽभिषिक्तश्च लक्ष्मणेन सहानघः । राज्यं प्राप्य पुरीं रम्यामयोध्यां पुनरागतः ॥
tato rāmo'bhiṣiktaśca lakṣmaṇena sahānaghaḥ | rājyaṃ prāpya purīṃ ramyāmayodhyāṃ punarāgataḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् निष्पाप राम ने लक्ष्मण के साथ राज्य प्राप्त करके रम्य अयोध्या पुरी में अभिषिक्त होकर प्रवेश किया।

🔹 English Translation : Then the sinless Rama, along with Lakshmana, having received the kingdom, returned to the beautiful city of Ayodhya and was consecrated.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ततःअव्ययतत्पश्चात्
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
अभिषिक्तःभूतकृदन्त, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनअभिषिक्त किए गए
अव्ययऔर
लक्ष्मणेनपुल्लिंग, तृतीया एकवचनलक्ष्मण के साथ
सहअव्ययसहित
अनघःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचननिष्पाप, पवित्र
राज्यम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनराज्य
प्राप्यल्यबन्त अव्यय (प्र + आप्)प्राप्त करके
पुरीम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचननगरी
रम्याम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनरम्य, सुन्दर
अयोध्याम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनअयोध्या
पुनःअव्ययफिर
आगतःभूतकृदन्त, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनआए

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक रामायण के उत्तरकाण्ड की प्रमुख घटना – राम के राज्याभिषेक का वर्णन करता है। चौदह वर्ष के वनवास के बाद राम अयोध्या लौटे और भरत ने उनका स्वागत किया। भरत ने राम की पादुका रखकर राज्य किया था, और अब उन्होंने राज्य राम को सौंप दिया। राम का राज्याभिषेक अयोध्या में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह घटना धर्म की विजय और सत्य की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। राम को "अनघः" कहा गया है, जो उनकी पवित्रता और निष्पापता को दर्शाता है।

राम का राज्याभिषेक दीपावली के रूप में मनाया जाता है, जब अयोध्या ने दीप जलाकर राम का स्वागत किया था। यह त्योहार आज भी अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप में मनाया जाता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, राम का राज्याभिषेक आत्मा (राम) का हृदय (अयोध्या) में पुनः स्थापित होना है। चौदह वर्ष का वनवास संसार के भोगों का प्रतीक है, जिनसे मुक्त होकर आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप में स्थित हो जाती है।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। यह विशेष रूप से गृह प्रवेश, विवाह या किसी शुभ अवसर पर पढ़ा जाता है।

॥ रामो राज्यमभिषिक्तो लक्ष्मणेन सहानघः ॥

जय श्री राम 🙏