संक्षेप रामायण – श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

ततः समुद्रमासाद्य रामः सुग्रीवमब्रवीत् । कथं तारामिमां सिन्धुं लङ्कां गन्तुं हरीश्वर ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् समुद्र के पास जाकर राम ने सुग्रीव से कहा – हे वानरराज! इस समुद्र को पार करके लंका तक कैसे पहुँचा जाए?

अर्थ / व्याख्या

राम और सुग्रीव समुद्र तट पर पहुँचते हैं, और राम समुद्र पार करने का उपाय पूछते हैं।

टिप्पणी

यह श्लोक राम के समुद्र तट पर पहुँचने और सुग्रीव से लंका जाने का उपाय पूछने का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ३२ – समुद्र तट पर राम-सुग्रीव संवाद ॥

ततः समुद्रमासाद्य रामः सुग्रीवमब्रवीत् । कथं तारामिमां सिन्धुं लङ्कां गन्तुं हरीश्वर ॥
tataḥ samudramāsādya rāmaḥ sugrīvamabravīt | kathaṃ tārāmimāṃ sindhuṃ laṅkāṃ gantuṃ harīśvara ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् समुद्र के पास जाकर राम ने सुग्रीव से कहा – हे वानरराज! इस समुद्र को पार करके लंका तक कैसे पहुँचा जाए?

🔹 English Translation : Then, approaching the ocean, Rama said to Sugriva: O king of monkeys, how can we cross this ocean and reach Lanka?

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ततःअव्ययतत्पश्चात्
समुद्रम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनसमुद्र को
आसाद्यल्यबन्त अव्यय (आ + सद्)प्राप्त करके, पास जाकर
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
सुग्रीवम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनसुग्रीव से
अब्रवीत्लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (ब्रू धातु)बोले, कहा
कथम्अव्ययकैसे
ताराम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन (तॄ धातु)पार करें
इमाम्सर्वनाम, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनइस
सिन्धुम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनसमुद्र को
लङ्काम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनलंका
गन्तुम्तुमुन्नन्त अव्यय (गम् धातु)जाने के लिए
हरीश्वरसम्बोधन (हरि + ईश्वर)हे वानरराज (सुग्रीव)

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक उस क्षण का वर्णन करता है जब राम और उनकी वानर सेना दक्षिण की ओर बढ़ते हुए समुद्र तट पर पहुँची। यह समुद्र वर्तमान में हिन्द महासागर का वह भाग है जो भारत और श्रीलंका के बीच है। राम ने सुग्रीव से प्रश्न किया कि इस विशाल जलराशि को कैसे पार किया जाए। सुग्रीव ने इसका उत्तर नहीं दिया, बल्कि वानरों की शक्ति का वर्णन किया। इसके बाद हनुमान की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। यह संवाद राम के नेतृत्व और योजना कौशल को दर्शाता है – वे किसी भी कार्य को करने से पूर्व उसके मार्ग का विचार करते हैं।

आध्यात्मिक अर्थ में, समुद्र संसार-सागर का प्रतीक है, जिसे पार करना कठिन है। राम का प्रश्न जीवात्मा के मोक्ष प्राप्ति के मार्ग की खोज को दर्शाता है। सुग्रीव (बुद्धि) यहाँ उपाय सुझाने में असमर्थ हैं, क्योंकि संसार-सागर को पार करने का मार्ग केवल भक्ति (हनुमान) से ही संभव है।

॥ समुद्रं शोषयामास यस्य बाणैः स राघवः ॥

जय श्री राम 🙏