संक्षेप रामायण – श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
ततः प्रवृत्ते वर्षाणां काले चत्वारि वै पुनः । रामः प्रविश्य सुग्रीवं प्रत्यपद्यत दुःखितः ॥
हिंदी अनुवाद
तत्पश्चात् वर्षा ऋतु के चार महीने बीत जाने पर राम ने सुग्रीव के पास जाकर दुःखपूर्वक (सीता के बारे में) पूछा।
अर्थ / व्याख्या
वर्षा ऋतु के चार मास बीत जाने पर राम ने सुग्रीव से भेंट की और सीता के वियोग में व्याकुल होकर उनसे सहायता का आग्रह किया। यह घटना किष्किन्धाकाण्ड की प्रमुख घटनाओं में से है।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण के किष्किन्धाकाण्ड की घटना को संक्षेप में बताता है, जहाँ राम वर्षा ऋतु के बाद सुग्रीव से सीता की खोज का आग्रह करते हैं।
॥ श्लोक ३१ – वर्षा ऋतु के बाद राम का सुग्रीव से आग्रह ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् वर्षा ऋतु के चार महीने बीत जाने पर राम ने सुग्रीव के पास जाकर दुःखपूर्वक (सीता के बारे में) पूछा।
🔹 English Translation : Then, after the four months of the rainy season had passed, Rama approached Sugriva and sadly (inquired about Sita).
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| ततः | अव्यय | तत्पश्चात् |
| प्रवृत्ते | भूतकृदन्त, नपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचन | बीत जाने पर |
| वर्षाणाम् | नपुंसकलिंग, षष्ठी बहुवचन | वर्षा ऋतु के |
| काले | पुल्लिंग, सप्तमी एकवचन | समय में |
| चत्वारि | संख्यावाचक, नपुंसकलिंग, प्रथमा बहुवचन | चार |
| वै | अव्यय | ही |
| पुनः | अव्यय | फिर |
| रामः | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | राम |
| प्रविश्य | ल्यबन्त अव्यय | प्रवेश करके |
| सुग्रीवम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | सुग्रीव के पास |
| प्रत्यपद्यत | लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्रति + आ + पद्) | प्राप्त हुए, पहुँचे |
| दुःखितः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | दुःखी होकर |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
यह श्लोक रामायण के किष्किन्धाकाण्ड की एक महत्वपूर्ण घटना की ओर संकेत करता है। वाली-वध के बाद राम ने सुग्रीव को राज्य सौंप दिया और स्वयं प्रस्रवण पर्वत पर निवास किया। वर्षा ऋतु के चार मास (आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन) व्यतीत होने पर राम सीता के वियोग में व्याकुल हो उठे। उन्होंने लक्ष्मण को सुग्रीव के पास भेजा, किन्तु यहाँ प्रत्यक्ष रूप से राम के सुग्रीव से मिलने का उल्लेख है। राम का धैर्य और संयम इस घटना में दिखता है; उन्होंने वर्षा ऋतु समाप्त होने की प्रतीक्षा की और फिर सीता की खोज का आग्रह किया। यह श्लोक हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोना चाहिए और उचित समय पर कार्य करना चाहिए।
आध्यात्मिक दृष्टि से, वर्षा ऋतु संकल्पों और भावनाओं के उद्रेक का समय है। राम का दुःखी होना जीवात्मा की परमात्मा से मिलन की व्याकुलता को दर्शाता है। सुग्रीव यहाँ गुरु या मार्गदर्शक के प्रतीक हैं, जिनसे सहायता माँगी जाती है।
॥ धैर्यं सर्वत्र साधनम् – धैर्य ही सफलता की कुंजी है ॥
जय श्री राम 🙏