संक्षेप रामायण – श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

सुग्रीवश्चिन्तयामास सह सर्वैर्महाबलैः । हनूमन्तं समाहूय प्रेषयामास दक्षिणाम् ॥

हिंदी अनुवाद

सुग्रीव ने सभी महाबलशाली वानरों के साथ विचार किया और हनुमान् को बुलाकर दक्षिण दिशा में भेजा।

अर्थ / व्याख्या

सुग्रीव सभी वानरों से विचार-विमर्श कर हनुमान् को दक्षिण दिशा में सीता की खोज हेतु भेजते हैं।

टिप्पणी

यह श्लोक सीता की खोज के लिए सुग्रीव द्वारा वानरों को विभिन्न दिशाओं में भेजने की घटना का सारांश है, जिसमें हनुमान् को दक्षिण का दायित्व मिला।

॥ श्लोक ३३ – हनुमान् का दक्षिण दिशा में प्रस्थान ॥

सुग्रीवश्चिन्तयामास सह सर्वैर्महाबलैः । हनूमन्तं समाहूय प्रेषयामास दक्षिणाम् ॥
sugrīvaścintayāmāsa saha sarvairmahābalaiḥ | hanūmantaṃ samāhūya preṣayāmāsa dakṣiṇām ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : सुग्रीव ने सभी महाबलशाली वानरों के साथ विचार किया और हनुमान् को बुलाकर दक्षिण दिशा में भेजा।

🔹 English Translation : Sugriva deliberated with all the mighty monkeys, and summoning Hanuman, sent him towards the south.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
सुग्रीवःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसुग्रीव
चिन्तयामासपरस्मैपद, लिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (चिन्त् + आम् + कृ)विचार किया
सहअव्ययसाथ
सर्वैःसर्वनाम, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचनसभी के साथ
महाबलैःविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचनमहाबलशाली वानरों के
हनूमन्तम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनहनुमान् को
समाहूयल्यबन्त अव्यय (सम् + आ + ह्वे)बुलाकर
प्रेषयामासलिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + इष् + आम् + कृ)भेजा
दक्षिणाम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनदक्षिण दिशा में

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

इस श्लोक में सुग्रीव की योजनाबद्धता और नेतृत्व क्षमता दिखती है। उन्होंने सभी वानर सेनापतियों के साथ मंत्रणा की और फिर हनुमान् को दक्षिण दिशा का नेतृत्व सौंपा। अन्य दिशाओं में अन्य वीरों को भेजा गया – पूर्व में विनत, पश्चिम में सुषेण, उत्तर में शतबलि, और दक्षिण में अंगद के नेतृत्व में हनुमान्, जाम्बवान् आदि। दक्षिण दिशा सबसे महत्वपूर्ण थी क्योंकि लंका उसी दिशा में स्थित थी। हनुमान् की नियुक्ति उनकी शक्ति, बुद्धि और भक्ति को देखते हुए की गई। यह घटना रामायण के किष्किन्धाकाण्ड की अंतिम घटनाओं में से है, जिसके बाद सुन्दरकाण्ड प्रारम्भ होता है।

हनुमान् का दक्षिण अभियान सम्पूर्ण रामायण की कुंजी है। उनकी शक्ति, संयम, और राम के प्रति अनन्य प्रेम ने ही सीता का पता लगाने में सफलता दिलाई। यह श्लोक हमें सिखाता है कि किसी भी कार्य में सफलता के लिए उचित योजना और सही व्यक्ति का चयन आवश्यक है।

॥ यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ॥

जय श्री राम 🙏