संक्षेप रामायण – श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

हनूमान् जाम्बवद्वाक्यादुत्पपात महोदधिम् । लङ्कां प्राप्य महातेजाः प्रविवेश निशाचरिम् ॥

हिंदी अनुवाद

हनुमान् जाम्बवान् के वचन से प्रेरित होकर महासागर पर छलांग लगाकर लंका पहुँचे और महातेजस्वी होकर राक्षसियों (लंका) में प्रवेश किया।

अर्थ / व्याख्या

जाम्बवान् के उत्साहवर्धन से हनुमान् समुद्र लाँघकर लंका पहुँचते हैं और उसमें प्रवेश करते हैं।

टिप्पणी

यह श्लोक हनुमान् के समुद्र लाँघने की घटना का वर्णन करता है, जो सुन्दरकाण्ड की प्रमुख घटना है।

॥ श्लोक ३४ – हनुमान् का समुद्र लाँघना और लंका प्रवेश ॥

हनूमान् जाम्बवद्वाक्यादुत्पपात महोदधिम् । लङ्कां प्राप्य महातेजाः प्रविवेश निशाचरिम् ॥
hanūmān jāmbavadvākyādutpapāta mahodadhim | laṅkāṃ prāpya mahātejāḥ praviveśa niśācarim ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : हनुमान् जाम्बवान् के वचन से प्रेरित होकर महासागर पर छलांग लगाकर लंका पहुँचे और महातेजस्वी होकर राक्षसियों (लंका) में प्रवेश किया।

🔹 English Translation : Hanuman, urged by the words of Jambavan, leaped across the great ocean, and reaching Lanka, the mighty one entered the city of the demons.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
हनूमान्पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनहनुमान्
जाम्बवद्वाक्यात्पुल्लिंग, पञ्चमी एकवचन (जाम्बवत् + वाक्य)जाम्बवान् के वचन से
उत्पपातलिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (उत् + पत्)उछले, छलांग लगाई
महोदधिम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन (महा + उदधि)महासागर पर
लङ्काम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनलंका
प्राप्यल्यबन्त अव्ययप्राप्त करके
महातेजाःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमहातेजस्वी
प्रविवेशलिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + विश्)प्रवेश किया
निशाचरिम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन (निशा + चर)राक्षसियों (लंका) में

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक सुन्दरकाण्ड के आरम्भ की महत्वपूर्ण घटना का वर्णन करता है। जब सभी वानर दक्षिण दिशा में सीता की खोज कर रहे थे, तब उनका उत्साह टूट गया क्योंकि समुद्र पार करना असंभव लग रहा था। तब जाम्बवान् ने हनुमान् को उनकी शक्तियों का स्मरण दिलाया और उन्हें समुद्र लाँघने के लिए प्रेरित किया। हनुमान् ने अपने शरीर का विशाल रूप धारण किया और सौ योजन (लगभग 1200 किमी) चौड़े समुद्र को लाँघ गए। रास्ते में उनका सामना मैनाक पर्वत, सुरसा नामक राक्षसी, और लंकिनी से हुआ, किन्तु उन्होंने सबको परास्त किया। लंका में प्रवेश कर वे रात्रि में सीता की खोज करने लगे। यह घटना हनुमान् की असीम शक्ति, बुद्धि और भक्ति का प्रतीक है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, समुद्र संसार का प्रतीक है, जिसे भक्ति (हनुमान्) ही पार कर सकती है। जाम्बवान् गुरु के प्रतीक हैं जो शिष्य की क्षमताओं को पहचानते हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाते हैं।

॥ हनूमान् सागरोत्तारः – हनुमान् समुद्र के पार ॥

जय श्री राम 🙏