संक्षेप रामायण – श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

तस्य पुत्रा महात्मानस्त्रयो वर्णस्य वर्धनाः । रामलक्ष्मणशत्रुघ्ना भरतश्च गुणैर्वराः ॥

हिंदी अनुवाद

उस महात्मा राजा दशरथ के तीन (चार) पुत्र हुए जो कुल की वृद्धि करने वाले थे – राम, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भरत, सभी गुणों में श्रेष्ठ थे।

अर्थ / व्याख्या

इस श्लोक में राजा दशरथ के चार पुत्रों का परिचय दिया गया है। यद्यपि पाठ में "त्रयो" (तीन) का उल्लेख है, किन्तु व्याख्या के अनुसार यह चार पुत्रों की ओर संकेत करता है। यह श्लोक बालकाण्ड के संक्षिप्त वर्णन का भाग है जहाँ नारद जी राम के जीवन की मुख्य घटनाएँ बता रहे हैं।

टिप्पणी

रामायण के इस भाग में चारों भाइयों के जन्म का उल्लेख है। ये सभी धार्मिक, पराक्रमी एवं सद्गुणों से सम्पन्न थे।

॥ श्लोक २१ – चारों भाइयों का परिचय ॥

तस्य पुत्रा महात्मानस्त्रयो वर्णस्य वर्धनाः । रामलक्ष्मणशत्रुघ्ना भरतश्च गुणैर्वराः ॥
tasya putrā mahātmānastrayo varṇasya vardhanāḥ | rāmalakṣmaṇaśatrughnā bharataśca guṇairvarāḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उस महात्मा राजा दशरथ के तीन (चार) पुत्र हुए जो कुल की वृद्धि करने वाले थे – राम, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भरत, सभी गुणों में श्रेष्ठ थे।

🔹 English Translation : That great-souled king Dasharatha had three (four) sons who increased the glory of their dynasty – Rama, Lakshmana, Shatrughna and Bharata, all endowed with excellent qualities.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
तस्यसर्वनाम, षष्ठी एकवचनउसके (दशरथ के)
पुत्राःपुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनपुत्र
महात्मानःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनमहान आत्मा वाले
त्रयःसंख्यावाचक, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनतीन (यहाँ चार के अर्थ में)
वर्णस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनवर्ण (कुल) की
वर्धनाःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनवृद्धि करने वाले
रामलक्ष्मणशत्रुघ्नाःनाम-समूह, प्रथमा बहुवचनराम, लक्ष्मण और शत्रुघ्न
भरतःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनभरत
अव्ययऔर
गुणैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनगुणों से
वराःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनश्रेष्ठ

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक रामायण के उस भाग का भाग है जहाँ महर्षि नारद राम के चरित्र का संक्षेप में वर्णन करते हैं। राजा दशरथ इक्ष्वाकु वंश के महान राजा थे। उनके चार पुत्रों का जन्म पुत्रकामेष्टि यज्ञ के फलस्वरूप हुआ था। ये चारों भाई परस्पर अत्यन्त प्रेम रखते थे। राम सबसे बड़े थे, फिर भरत, फिर लक्ष्मण और सबसे छोटे शत्रुघ्न। लक्ष्मण राम के साथ वन गए, शत्रुघ्न भरत के साथ रहे। इन चारों के गुणों ने रघुकुल की कीर्ति को चारों दिशाओं में फैलाया।

व्याकरण की दृष्टि से यहाँ "त्रयः" का प्रयोग विशेष है। आचार्यों का कहना है कि यह चारों पुत्रों को एक साथ त्रयः कहना उनकी अभिन्नता को दर्शाता है, अथवा यह मूल पाठ में परवर्ती परिवर्तन हो सकता है। अधिकांश टीकाओं में इसे चार ही माना गया है।

इस श्लोक में अनुप्रास अलंकार भी है – रामलक्ष्मणशत्रुघ्ना में ण और न की आवृत्ति। यह श्लोक अनुष्टुप् छंद में है, जो रामायण का प्रमुख छंद है।

आध्यात्मिक दृष्टि से चारों भाई चार मानवीय लक्ष्यों (पुरुषार्थ) के प्रतीक माने जाते हैं – राम धर्म के, भरत अर्थ के, लक्ष्मण काम के (इच्छाशक्ति) और शत्रुघ्न मोक्ष के (शत्रुओं का नाश करने वाले)।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक के नियमित पाठ से पारिवारिक एकता, भाईचारा और सद्गुणों की वृद्धि होती है। यह श्लोक रामायण के पाठ का आरम्भिक भाग है और प्रायः सुन्दरकाण्ड के पाठ से पूर्व बोला जाता है।

॥ रामो विग्रहवान् धर्मः – राम स्वयं धर्म के अवतार हैं ॥

जय श्री राम 🙏