संक्षेप रामायण – श्लोक 53

संस्कृत श्लोक

सीतायां जनसंवादो रामस्याप्यभवत्तदा । लोकापवादभीतेन सा त्यक्ता जनकात्मजा ॥

हिंदी अनुवाद

उस समय सीता के विषय में जनता में संवाद (अफवाह) हुई, और लोकापवाद से भयभीत राम ने जनकात्मजा सीता का त्याग कर दिया।

अर्थ / व्याख्या

राम ने लोकापवाद के भय से सीता का त्याग किया।

॥ श्लोक ५३ – सीता त्याग का आदेश ॥

सीतायां जनसंवादो रामस्याप्यभवत्तदा । लोकापवादभीतेन सा त्यक्ता जनकात्मजा ॥
sītāyāṃ janasaṃvādo rāmasyāpyabhavattadā | lokāpavādabhītena sā tyaktā janakātmajā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उस समय सीता के विषय में जनता में संवाद (अफवाह) हुई, और लोकापवाद से भयभीत राम ने जनकात्मजा सीता का त्याग कर दिया।

🔹 English Translation : Then there arose public gossip about Sita, and Rama, fearing public censure, abandoned the daughter of Janaka.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
सीतायाम्स्त्रीलिंग, सप्तमी एकवचनसीता के विषय में
जनसंवादःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजनता में संवाद (अफवाह)
रामस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनराम के
अपिअव्ययभी
अभवत्लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (भू धातु)हुआ
तदाअव्ययउस समय
लोकापवादभीतेनविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचनलोकापवाद से भयभीत
सासर्वनाम, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनउस (सीता) का
त्यक्ताभूतकृदन्त, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनत्याग किया गया
जनकात्मजास्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनजनक की पुत्री (सीता)

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

राम के राज्याभिषेक के बाद जब सीता गर्भवती थीं, तब अयोध्या की जनता में यह अफवाह फैल गई कि सीता रावण के महल में रही हैं, अतः वे पवित्र नहीं हैं। राम ने लोकापवाद के भय से सीता को त्यागने का कठोर निर्णय लिया। उन्होंने लक्ष्मण को आदेश दिया कि वे सीता को गंगा तट पर वन में छोड़ आएँ। यह घटना रामायण के उत्तरकाण्ड की प्रमुख घटना है और राम के चरित्र के एक दुखद पहलू को दर्शाती है।

यह प्रसंग राजधर्म और निजी धर्म के बीच संघर्ष को दर्शाता है। राम एक आदर्श राजा थे, उनके लिए प्रजा की भावना सर्वोपरि थी। उन्होंने अपने व्यक्तिगत सुख का त्याग करके राजधर्म का पालन किया। सीता का त्याग उनके लिए अत्यन्त कष्टदायक था, फिर भी उन्होंने यह निर्णय लिया।

आध्यात्मिक दृष्टि से, यह घटना संसार की निन्दा (अपवाद) के भय से आत्मा (राम) द्वारा शक्ति (सीता) के त्याग का प्रतीक है।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से कर्तव्यपरायणता और त्याग की भावना जाग्रत होती है। यह उन लोगों के लिए लाभदायक है जिन्हें समाज की निन्दा का सामना करना पड़ता है।

॥ लोकापवादभीतेन सीता त्यक्ता रघूत्तमैः ॥

जय श्री राम 🙏