संक्षेप रामायण – श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

ततो लक्ष्मणमाहूय रामः शोकाकुलस्तदा । गङ्गाकूले विवासाय प्रेषयामास धर्मवित् ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् धर्मज्ञ राम ने शोकाकुल होकर लक्ष्मण को बुलाया और गंगा के तट पर निर्वासन के लिए भेज दिया।

अर्थ / व्याख्या

राम ने लक्ष्मण को सीता को वन में छोड़ने का आदेश दिया।

॥ श्लोक ५४ – लक्ष्मण को निर्वासन का आदेश ॥

ततो लक्ष्मणमाहूय रामः शोकाकुलस्तदा । गङ्गाकूले विवासाय प्रेषयामास धर्मवित् ॥
tato lakṣmaṇamāhūya rāmaḥ śokākulastadā | gaṅgākūle vivāsāya preṣayāmāsa dharmavit ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् धर्मज्ञ राम ने शोकाकुल होकर लक्ष्मण को बुलाया और गंगा के तट पर निर्वासन के लिए भेज दिया।

🔹 English Translation : Then the knower of dharma, Rama, overwhelmed with grief, summoned Lakshmana and sent him to exile (Sita) on the banks of the Ganga.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ततःअव्ययतत्पश्चात्
लक्ष्मणम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनलक्ष्मण को
आहूयल्यबन्त अव्यय (आ + ह्वे)बुलाकर
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
शोकाकुलःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनशोक से आकुल
तदाअव्ययउस समय
गङ्गाकूलेनपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचनगंगा के तट पर
विवासायपुल्लिंग, चतुर्थी एकवचननिर्वासन के लिए
प्रेषयामासलिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + इष् + आम् + कृ)भेजा
धर्मवित्विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनधर्म को जानने वाले

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

राम ने यह कठोर निर्णय लेते समय स्वयं अत्यन्त शोकाकुल थे। उन्होंने लक्ष्मण को बुलाया और सीता को गंगा तट पर वन में छोड़ने का आदेश दिया। यह आदेश सुनकर लक्ष्मण भी व्याकुल हो गए, किन्तु उन्होंने राम की आज्ञा का पालन किया। वे सीता को रथ में बिठाकर गंगा तट पर ले गए, और वहाँ ऋषि वाल्मीकि के आश्रम के पास उन्हें छोड़ दिया। यह घटना रामायण का अत्यन्त हृदयविदारक प्रसंग है।

राम को "धर्मवित्" कहा गया है – वे धर्म के ज्ञाता थे। उन्होंने यह निर्णय राजधर्म के पालन के लिए लिया, न कि व्यक्तिगत इच्छा से। यह उनके चरित्र की महानता को दर्शाता है।

॥ रामस्याज्ञा सुदुःखार्ता लक्ष्मणेन निपातिता ॥

जय श्री राम 🙏