संक्षेप रामायण – श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

सीता तु पुनरालक्ष्य रामस्य वचनात्तदा । भूमिं विवेश धर्मज्ञा पतिव्रतापरायणा ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् सीता ने राम के वचन को सुनकर (या लक्ष्य करके), धर्मज्ञा और पतिव्रतापरायणा होकर भूमि में प्रवेश कर लिया।

अर्थ / व्याख्या

सीता ने राम के कथन के अनुसार भूमि में समाधि ले ली।

॥ श्लोक ५९ – सीता का धरती में प्रवेश ॥

सीता तु पुनरालक्ष्य रामस्य वचनात्तदा । भूमिं विवेश धर्मज्ञा पतिव्रतापरायणा ॥
sītā tu punarālakṣya rāmasya vacanāttadā | bhūmiṃ viveśa dharmajñā pativratāparāyaṇā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् सीता ने राम के वचन को सुनकर (या लक्ष्य करके), धर्मज्ञा और पतिव्रतापरायणा होकर भूमि में प्रवेश कर लिया।

🔹 English Translation : Then Sita, having heard (or perceived) Rama is words, being knower of dharma and devoted to her husband, entered the earth.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
सीतास्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनसीता
तुअव्ययतो
पुनःअव्ययफिर
आलक्ष्यल्यबन्त अव्यय (आ + लक्ष्)लक्ष्य करके, देखकर
रामस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनराम के
वचनात्नपुंसकलिंग, पञ्चमी एकवचनवचन से
तदाअव्ययउस समय
भूमिम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनभूमि में
विवेशलिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (विश् धातु)प्रवेश किया
धर्मज्ञाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनधर्म को जानने वाली
पतिव्रतापरायणाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनपतिव्रता धर्म में तत्पर

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

लव-कुश के रामायण गायन के बाद राम ने उन्हें पहचान लिया और सीता को लाने के लिए कहा। वाल्मीकि ने सीता को लाकर राम को सौंपा और कहा कि वे पवित्र हैं। किन्तु राम ने फिर से कहा कि वे तो जानते हैं कि सीता पवित्र हैं, किन्तु लोकनिन्दा के भय से वे उन्हें रखना चाहते हैं, इसलिए सीता को एक अन्तिम परीक्षा देनी होगी। यह सुनकर सीता अत्यन्त दुःखी हुईं और उन्होंने धरती माता से प्रार्थना की कि यदि वे पवित्र हैं तो उन्हें धरती में स्थान दें। तुरन्त भूमि फटी और सीता धरती में समा गईं।

यह घटना रामायण का अत्यन्त दुखद अन्त है। सीता, जो पतिव्रता और धर्मज्ञा थीं, ने अपनी अंतिम परीक्षा में भी सफल होकर धरती में समा लिया। राम ने सीता के बिना बाकी जीवन अकेले बिताया और अन्त में सरयू नदी में जलसमाधि ले ली।

यह प्रसंग हमें सिखाता है कि समाज की निन्दा कितनी भयानक हो सकती है, और धर्म के मार्ग पर चलने वालों को भी कष्ट सहना पड़ता है।

॥ सीता भूमिं विवेशाथ पतिव्रता सती सती ॥

जय श्री राम 🙏