संक्षेप रामायण – श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
लवकुशौ तु तौ वीरौ रामस्य चरितं महत् । गायन्तौ विबुधैः सार्धं रामायणमगायताम् ॥
हिंदी अनुवाद
वे दोनों वीर लव और कुश राम के महान् चरित्र का गान करते हुए, विद्वानों के साथ रामायण का गायन करने लगे।
अर्थ / व्याख्या
लव-कुश ने रामायण का गायन किया।
॥ श्लोक ५८ – लव-कुश का रामायण गायन ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : वे दोनों वीर लव और कुश राम के महान् चरित्र का गान करते हुए, विद्वानों के साथ रामायण का गायन करने लगे।
🔹 English Translation : Those two valiant ones, Lava and Kusha, singing the great deeds of Rama, along with the learned ones, recited the Ramayana.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| लवकुशौ | पुल्लिंग, प्रथमा द्विवचन | लव और कुश |
| तु | अव्यय | तो |
| तौ | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा द्विवचन | वे दोनों |
| वीरौ | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा द्विवचन | वीर |
| रामस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | राम के |
| चरितम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | चरित्र |
| महत् | विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | महान् |
| गायन्तौ | शतृप्रत्यय, पुल्लिंग, प्रथमा द्विवचन | गाते हुए |
| विबुधैः | पुल्लिंग, तृतीया बहुवचन | विद्वानों के साथ |
| सार्धम् | अव्यय | साथ |
| रामायणम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | रामायण |
| अगायताम् | लङ्लकार, प्रथमपुरुष द्विवचन (गै धातु) | गान करने लगे |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
वाल्मीकि ने लव और कुश को रामायण का गान सिखाया। अश्वमेध यज्ञ के अवसर पर, वे दोनों वीणा बजाते हुए रामायण के श्लोक गाने लगे। उनका गान इतना मधुर और भावपूर्ण था कि राम स्वयं मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने दोनों को देखा और पहचान लिया कि ये उनके पुत्र हैं। इस घटना के बाद राम ने सीता को वापस लाने का प्रयास किया, किन्तु सीता ने धरती में समाकर अपनी अंतिम लीला समाप्त कर दी।
यह प्रसंग रामायण के अन्तिम भाग (उत्तरकाण्ड) का है। लव-कुश के गायन ने रामायण को अमर बना दिया। आज भी रामलीला और रामायण के पाठ की परंपरा इसी से प्रारम्भ हुई।
आध्यात्मिक दृष्टि से, लव-कुश का गायन भक्ति का प्रतीक है। भगवान् के गुणों का कीर्तन करने से वे स्वयं भी प्रसन्न होते हैं।
॥ रामायणं लवकुशौ गायन्तौ रामसंनिधौ ॥
जय श्री राम 🙏