संक्षेप रामायण – श्लोक 57

संस्कृत श्लोक

रामस्त्वश्वमेधेन यज्ञेन यजतां वरः । इष्ट्वा बहुविधैर्यज्ञैर्ब्राह्मणैः पूजितोऽभवत् ॥

हिंदी अनुवाद

राम ने यज्ञ करने वालों में श्रेष्ठ होकर अश्वमेध यज्ञ किया और अन्य बहुविध यज्ञों का अनुष्ठान करके ब्राह्मणों द्वारा पूजित हुए।

अर्थ / व्याख्या

राम ने अश्वमेध और अन्य यज्ञ किए।

॥ श्लोक ५७ – राम का अश्वमेध यज्ञ ॥

रामस्त्वश्वमेधेन यज्ञेन यजतां वरः । इष्ट्वा बहुविधैर्यज्ञैर्ब्राह्मणैः पूजितोऽभवत् ॥
rāmastvaśvamedhena yajñena yajatāṃ varaḥ | iṣṭvā bahuvidhairyajñairbrāhmaṇaiḥ pūjito'bhavat ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : राम ने यज्ञ करने वालों में श्रेष्ठ होकर अश्वमेध यज्ञ किया और अन्य बहुविध यज्ञों का अनुष्ठान करके ब्राह्मणों द्वारा पूजित हुए।

🔹 English Translation : Rama, the foremost among performers of sacrifices, performed the Ashvamedha sacrifice and, having performed various other sacrifices, was honored by the brahmanas.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
तुअव्ययतो
अश्वमेधेनपुल्लिंग, तृतीया एकवचनअश्वमेध से
यज्ञेनपुल्लिंग, तृतीया एकवचनयज्ञ से
यजताम्पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचन (यजत् शब्द)यज्ञ करने वालों में
वरःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनश्रेष्ठ
इष्ट्वाल्यबन्त अव्यय (यज् धातु)यज्ञ करके
बहुविधैःविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचनबहुविध
यज्ञैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनयज्ञों द्वारा
ब्राह्मणैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनब्राह्मणों द्वारा
पूजितःभूतकृदन्त, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनपूजित
अभवत्लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (भू धातु)हुए

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

राम ने अपने राज्यकाल में अनेक यज्ञ किए, जिनमें अश्वमेध यज्ञ प्रमुख था। अश्वमेध यज्ञ एक राजसूय यज्ञ होता है, जिसमें एक घोड़े को छोड़ा जाता है और उसके पीछे राजा की सेना चलती है। जिन राज्यों से घोड़ा गुजरता है, वे राजा की अधीनता स्वीकार करते हैं। यह यज्ञ राम की सार्वभौम सत्ता और धर्मनिष्ठा को दर्शाता है।

इस यज्ञ में ब्राह्मणों ने राम की पूजा की और उन्हें आशीर्वाद दिया। यज्ञ के अवसर पर लव-कुश ने वाल्मीकि रामायण का गायन किया, जिससे राम को अपने पुत्रों का पता चला।

आध्यात्मिक दृष्टि से, अश्वमेध यज्ञ अहंकार और इन्द्रियों (अश्व) पर नियंत्रण का प्रतीक है। राम ने यज्ञ करके यह सिद्ध किया कि वे केवल योद्धा ही नहीं, बल्कि धार्मिक और दार्शनिक भी थे।

॥ अश्वमेधेन यज्ञेन रामः सम्पूजितोऽभवत् ॥

जय श्री राम 🙏