अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
तस्य राज्ञो वरं प्रादान्मुनिः परमधार्मिकः। येन तुष्टो महातेजा दशरथस्य धीमतः॥
हिंदी अनुवाद
उस परमधार्मिक मुनि ने राजा को वरदान दिया, जिससे वे महातेजस्वी एवं धीमान् दशरथ अत्यंत प्रसन्न हो गए।
अर्थ / व्याख्या
यह श्लोक मुनि द्वारा राजा को वरदान दिए जाने का वर्णन करता है।
टिप्पणी
इस श्लोक में वरदान की प्रकृति का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, परंतु संदर्भ से यह स्पष्ट है कि यह वरदान पुत्र प्राप्ति से संबंधित था। "प्रादात्" (दिया) भूतकाल में वरदान की घटना को स्थापित करता है।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड, सर्ग ७, श्लोक ४४ ॥
येन तुष्टो महातेजा दशरथस्य धीमतः॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : उस परमधार्मिक मुनि ने राजा को वरदान दिया, जिससे वे महातेजस्वी एवं धीमान् दशरथ अत्यंत प्रसन्न हो गए।
🔹 English Translation : That supremely righteous sage gave a boon to the king, by which the greatly radiant and wise Dasharatha was pleased.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| तस्य | सर्वनाम, पुल्लिंग, चतुर्थी एकवचन | उस (राजा) को |
| राज्ञः | पुल्लिंग, चतुर्थी एकवचन | राजा को |
| वरम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | वर |
| प्रादात् | क्रिया, लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + दा धातु) | दिया |
| मुनिः | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | मुनि ने |
| परमधार्मिकः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | परम धार्मिक |
| येन | सर्वनाम, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन | जिससे |
| तुष्टः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (तुष् धातु, क्त) | प्रसन्न |
| महातेजाः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | महान तेजस्वी |
| दशरथस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | दशरथ |
| धीमतः | विशेषण, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | बुद्धिमान |
यह श्लोक राजा और मुनि के संवाद के फलस्वरूप मिले वरदान को दर्शाता है। राजा की श्रद्धा और मुनि की कृपा से यह वरदान संभव हुआ। आगे चलकर इसी वरदान के फलस्वरूप राजा को पुत्रों की प्राप्ति होती है। "तुष्टः" शब्द राजा की मनःस्थिति को व्यक्त करता है, जो वरदान पाकर अत्यंत प्रसन्न हैं।