अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
ततः सरय्वाः सलिलं पातुं यातो नराधिपः। अपश्यत् स महातेजा मुनिं दीर्घं तपोधनम्॥
हिंदी अनुवाद
तत्पश्चात् नराधिप (राजा) सरयू के जल को पीने के लिए गए। उस महातेजस्वी राजा ने एक दीर्घ तपोधन (दीर्घकाल तक तप करने वाले) मुनि को देखा।
अर्थ / व्याख्या
यह श्लोक राजा द्वारा सरयू तट पर एक महान तपस्वी के दर्शन का वर्णन करता है।
टिप्पणी
यह श्लोक राजा के नियमित कार्यों और ऋषियों के प्रति उनकी श्रद्धा को दर्शाता है। "तपोधनम्" का अर्थ है जिसका धन तप है, अर्थात् तपस्वी। "दीर्घम्" विशेषण मुनि की तपस्या की लंबी अवधि को इंगित करता है।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड, सर्ग ७, श्लोक ४२ ॥
अपश्यत् स महातेजा मुनिं दीर्घं तपोधनम्॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् नराधिप (राजा) सरयू के जल को पीने के लिए गए। उस महातेजस्वी राजा ने एक दीर्घ तपोधन (दीर्घकाल तक तप करने वाले) मुनि को देखा।
🔹 English Translation : Then the lord of men (king) went to drink the water of the Sarayu. That greatly radiant king saw a sage who possessed the wealth of long austerity.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| ततः | अव्यय | तत्पश्चात् |
| सरय्वाः | स्त्रीलिंग, षष्ठी एकवचन | सरयू नदी का |
| सलिलम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | जल |
| पातुम् | क्रिया, तुमुन्नन्त अव्यय (पा धातु) | पीने के लिए |
| यातः | क्रिया, क्त प्रत्यय, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (या धातु) | गए |
| नराधिपः | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | राजा |
| अपश्यत् | क्रिया, लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (दृश् धातु) | देखा |
| सः | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | उसने |
| महातेजाः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | महान तेजस्वी |
| मुनिम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | मुनि को |
| दीर्घम् | विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | दीर्घकालीन |
| तपोधनम् | विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | तप ही जिसका धन है (तपस्वी) |
यह श्लोक राजा और ऋषि के मिलन का प्रारंभिक बिंदु है। राजा का सरयू तट पर जाना स्वाभाविक क्रिया है, परंतु वहाँ उन्हें एक महान तपस्वी मुनि के दर्शन होते हैं। यह दर्शन आगे चलकर राजा के लिए वरदान और पुत्र प्राप्ति का कारण बनता है। "महातेजाः" राजा के लिए प्रयुक्त है और "तपोधनम्" मुनि के लिए, दोनों के गुणों का सुंदर सम्मिलन है।