अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
त्वमेव मन्त्रिणां श्रेष्ठ उपायं परिचिन्तय। येन पुत्रं लभेयाहमृत्विग्भिश्च समन्वितः॥
हिंदी अनुवाद
तुम ही मंत्रियों में श्रेष्ठ हो; ऐसा उपाय सोचो जिससे मैं ऋत्विजों से युक्त होकर पुत्र प्राप्त कर सकूँ।
अर्थ / व्याख्या
राजा सुमंत्र से पुत्र प्राप्ति का उपाय पूछते हैं।
टिप्पणी
यहाँ 'परिचिन्तय' उपसर्गपूर्वक आग्रह दर्शाता है। राजा चाहते हैं कि सुमंत्र कोई ऐसा मार्ग सुझाएँ जिससे यज्ञ (ऋत्विजों सहित) के माध्यम से पुत्र की प्राप्ति हो। यह आगे चलकर ऋष्यशृंग के आगमन और पुत्रेष्टि यज्ञ का मार्ग प्रशस्त करता है।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड, सर्ग ७, श्लोक ४० ॥
येन पुत्रं लभेयाहमृत्विग्भिश्च समन्वितः॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : तुम ही मंत्रियों में श्रेष्ठ हो; ऐसा उपाय सोचो जिससे मैं ऋत्विजों से युक्त होकर पुत्र प्राप्त कर सकूँ।
🔹 English Translation : You are the best of ministers; think of a means by which I, together with Ritvijas, may obtain a son.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| त्वम् | मध्यमपुरुष एकवचन | तुम |
| एव | अव्यय | ही |
| मन्त्रिणाम् | पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचन | मंत्रियों में |
| श्रेष्ठ | विशेषण, पुल्लिंग, सम्बोधन एकवचन | श्रेष्ठ (हे श्रेष्ठ) |
| उपायम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | उपाय |
| परिचिन्तय | क्रिया, लोट्लकार, मध्यमपुरुष एकवचन (परि + चिन्त्) | अच्छी तरह सोचो |
| येन | सर्वनाम, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन | जिससे |
| पुत्रम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | पुत्र को |
| लभेय | क्रिया, विधिलिङ्, उत्तमपुरुष एकवचन (लभ् धातु, आत्मनेपद) | प्राप्त करूँ |
| अहम् | उत्तमपुरुष एकवचन | मैं |
| ऋत्विग्भिः | पुल्लिंग, तृतीया बहुवचन | ऋत्विजों से |
| च | अव्यय | और |
| समन्वितः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | युक्त |
इस श्लोक में राजा सुमंत्र को उपाय सुझाने का आदेश देते हैं। वे मानते हैं कि पुत्र प्राप्ति का एकमात्र मार्ग यज्ञ ही है, इसलिए ऋत्विजों सहित उपाय की बात करते हैं। यह राजा की धार्मिक निष्ठा और वैदिक मार्ग में आस्था को दर्शाता है।