अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

एवं प्रशासतस्तस्य पृथिवीं सागराम्बराम्। कालः प्रावर्तत महान्बहुवर्षगणायुतः॥

हिंदी अनुवाद

इस प्रकार समुद्रपर्यन्त (सागर अम्बर) पृथ्वी का शासन करते हुए उन (राजा) के बहुत वर्षों का महान काल व्यतीत हो गया।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक राजा दशरथ के दीर्घकालीन शासन का वर्णन करता है।

टिप्पणी

यहाँ राजा के शासन की अवधि को 'बहुवर्षगणायुतः' कहा गया है, जो दर्शाता है कि उन्होंने बहुत वर्षों तक राज्य किया। 'सागराम्बराम्' का अर्थ है जिसकी सीमा सागर है अर्थात् संपूर्ण पृथ्वी। यह राजा की सार्वभौम सत्ता को दर्शाता है।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड, सर्ग ७, श्लोक ३६ ॥

एवं प्रशासतस्तस्य पृथिवीं सागराम्बराम्।
कालः प्रावर्तत महान्बहुवर्षगणायुतः॥
evaṃ praśāsatas tasya pṛthivīṃ sāgarāmbarām | kālaḥ prāvartata mahān bahuvarsagaṇāyutaḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : इस प्रकार समुद्रपर्यन्त (सागर अम्बर) पृथ्वी का शासन करते हुए उन (राजा) के बहुत वर्षों का महान काल व्यतीत हो गया।

🔹 English Translation : Thus, while he was ruling the earth bounded by the seas, a long period of many years passed.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
एवम्अव्ययइस प्रकार
प्रशासतःक्रिया, शतृ प्रत्यय, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन (प्र + शास्)शासन करते हुए
तस्यसर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचनउस (राजा) के
पृथिवीम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनपृथ्वी को
सागराम्बराम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनसागर जिसका वस्त्र (सीमा) है, समुद्रपर्यंत
कालःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनकाल, समय
प्रावर्ततक्रिया, लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + वृत्)व्यतीत हुआ, बीता
महान्विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमहान
बहुवर्षगणायुतःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (बहु + वर्ष + गण + आयुत)बहुत वर्षों के समूह से युक्त

यह श्लोक समय के प्रवाह को दर्शाता है। राजा दशरथ ने यज्ञ के बाद भी लंबे समय तक राज्य किया, परंतु पुत्र प्राप्ति नहीं हुई। यह अगले श्लोकों में उनकी चिंता का कारण बनता है। 'बहुवर्षगणायुतः' से पता चलता है कि कितने वर्ष बीत गए, फिर भी पुत्र नहीं हुआ।