अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

ते च सर्वे द्विजश्रेष्ठाः प्रतिगृह्य महाधनम्। ऊचुः प्राञ्जलयो राज्ञं पुत्रप्राप्तिर्भविष्यति॥

हिंदी अनुवाद

उन सभी द्विजश्रेष्ठों ने महाधन ग्रहण करके हाथ जोड़कर राजा से कहा – "आपको पुत्र की प्राप्ति होगी।"

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक ऋत्विजों द्वारा राजा को दिए गए आशीर्वाद का वर्णन करता है।

टिप्पणी

दक्षिणा ग्रहण करने के बाद ऋत्विजों का आशीर्वाद देना यज्ञ की पूर्णता का सूचक है। 'प्राञ्जलयः' (हाथ जोड़कर) विनय और आदर का भाव दर्शाता है। यहाँ पुत्रप्राप्ति का वचन भविष्यत्काल में दिया गया है, जो निश्चित फल का द्योतक है।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड, सर्ग ७, श्लोक ३४ ॥

ते च सर्वे द्विजश्रेष्ठाः प्रतिगृह्य महाधनम्।
ऊचुः प्राञ्जलयो राज्ञं पुत्रप्राप्तिर्भविष्यति॥
te ca sarve dvijaśreṣṭhāḥ pratigṛhya mahādhanam | ūcuḥ prāñjalayo rājñaṃ putraprāptirbhaviṣyati ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उन सभी द्विजश्रेष्ठों ने महाधन ग्रहण करके हाथ जोड़कर राजा से कहा – "आपको पुत्र की प्राप्ति होगी।"

🔹 English Translation : All those best among the twice-born, having accepted the great wealth, with folded hands said to the king, "You will obtain sons."

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
तेसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनवे
अव्ययऔर
सर्वेविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनसभी
द्विजश्रेष्ठाःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनद्विजों में श्रेष्ठ
प्रतिगृह्यक्रिया, ल्यबन्त अव्यय (प्रति + ग्रह्)ग्रहण करके
महाधनम्विशेषण/नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनमहान धन
ऊचुःक्रिया, लिट्लकार, प्रथमपुरुष बहुवचन (वच् धातु)बोले
प्राञ्जलयःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनहाथ जोड़कर (प्र + अञ्जलि)
राज्ञम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनराजा से
पुत्रप्राप्तिःस्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनपुत्र की प्राप्ति
भविष्यतिक्रिया, लृट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (भू धातु)होगी

यह श्लोक यज्ञ के फल की घोषणा करता है। ऋत्विजों का आशीर्वाद ही वह बीज है जो आगे चलकर राम आदि पुत्रों के रूप में फलित होता है। 'महाधनम्' ग्रहण करने के बाद भी वे राजा को आशीर्वाद देते हैं, यह दर्शाता है कि धन का मोह त्यागकर वे राजा के कल्याण की कामना करते हैं।