संक्षेप रामायण – श्लोक 74

संस्कृत श्लोक

रामायणमिदं दिव्यं सर्वकामफलप्रदम् । ददाति विप्रमुख्येभ्यो यः स याति परां गतिम् ॥

हिंदी अनुवाद

यह दिव्य, सभी कामनाओं का फल देने वाला रामायण जो ब्राह्मणों में श्रेष्ठ को दान में देता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।

अर्थ / व्याख्या

रामायण का दान करने वाला परमगति (मोक्ष) को प्राप्त होता है।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के दान के फल का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ७४ – रामायण दान से परमगति ॥

रामायणमिदं दिव्यं सर्वकामफलप्रदम् । ददाति विप्रमुख्येभ्यो यः स याति परां गतिम् ॥
rāmāyaṇamidaṃ divyaṃ sarvakāmaphalapradam | dadāti vipramukhyebhyo yaḥ sa yāti parāṃ gatim ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : यह दिव्य, सभी कामनाओं का फल देने वाला रामायण जो ब्राह्मणों में श्रेष्ठ को दान में देता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।

🔹 English Translation : He who gives this divine Ramayana, which grants the fruit of all desires, to the foremost of brahmanas, attains the supreme goal.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
रामायणम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनरामायण
इदम्सर्वनाम, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनइस
दिव्यम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनदिव्य
सर्वकामफलप्रदम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनसभी कामनाओं का फल देने वाला
ददातिलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (दा धातु)देता है
विप्रमुख्येभ्यःपुल्लिंग, चतुर्थी बहुवचनब्राह्मणों में श्रेष्ठ को
यःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजो
सःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनवह
यातिलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (या धातु)जाता है
पराम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनपरम
गतिम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनगति को

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

दान का भारतीय संस्कृति में बहुत महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि विद्या का दान सर्वश्रेष्ठ दान होता है। रामायण जैसे पवित्र ग्रन्थ का दान करना तो और भी पुण्यकारी है। यहाँ "विप्रमुख्येभ्यः" कहकर योग्य ब्राह्मण को दान देने का विधान है, क्योंकि वे उसका सदुपयोग करेंगे और उसका प्रचार करेंगे।

इस दान से दाता को "परां गतिम्" की प्राप्ति होती है, अर्थात् मोक्ष या ब्रह्मलोक। यह दान के उच्चतम फल को दर्शाता है।

आज भी रामायण, गीता आदि ग्रन्थों का दान धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। यह श्लोक उस परंपरा की पुष्टि करता है।

॥ रामायणस्य दानेन प्राप्नोति परमां गतिम् ॥

जय श्री राम 🙏