संक्षेप रामायण – श्लोक 75

संस्कृत श्लोक

एकैकं रामचरितं यः पठेत् श्रद्धयान्वितः । तस्य पुण्यफलं वक्तुं न शक्यं वर्षकोटिभिः ॥

हिंदी अनुवाद

जो श्रद्धा से युक्त होकर रामचरित के एक-एक (श्लोक) को पढ़ता है, उसके पुण्यफल को करोड़ों वर्षों में भी नहीं कहा जा सकता।

अर्थ / व्याख्या

रामायण के एक-एक श्लोक के पाठ का फल अपरिमित है।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के प्रत्येक श्लोक की महिमा का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ७५ – रामायण के एक-एक श्लोक का अपरिमित पुण्य ॥

एकैकं रामचरितं यः पठेत् श्रद्धयान्वितः । तस्य पुण्यफलं वक्तुं न शक्यं वर्षकोटिभिः ॥
ekaikaṃ rāmacaritaṃ yaḥ paṭhet śraddhayānvitaḥ | tasya puṇyaphalaṃ vaktuṃ na śakyaṃ varṣakoṭibhiḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : जो श्रद्धा से युक्त होकर रामचरित के एक-एक (श्लोक) को पढ़ता है, उसके पुण्यफल को करोड़ों वर्षों में भी नहीं कहा जा सकता।

🔹 English Translation : He who reads each (verse) of the story of Rama with faith, the merit of that cannot be described even in crores of years.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
एकैकम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनएक-एक
रामचरितम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनराम के चरित्र (के श्लोक) को
यःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजो
पठेत्विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (पठ् धातु)पढ़े
श्रद्धयान्वितःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (श्रद्धया + अन्वितः)श्रद्धा से युक्त
तस्यसर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचनउसके
पुण्यफलम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनपुण्यफल को
वक्तुम्तुमुन्नन्त अव्यय (वच् धातु)कहने के लिए
अव्ययनहीं
शक्यम्विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनशक्य
वर्षकोटिभिःनपुंसकलिंग, तृतीया बहुवचनकरोड़ों वर्षों में

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक रामायण के प्रत्येक श्लोक की महिमा का बखान करता है। यहाँ "रामचरितम्" का अर्थ है राम के चरित्र का वर्णन करने वाला प्रत्येक श्लोक। जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक एक भी श्लोक पढ़ता है, उसके पुण्य का वर्णन करोड़ों वर्षों में भी नहीं किया जा सकता। यह एक अतिशयोक्ति है, जो रामायण की महिमा को चरम पर पहुँचाती है।

इसका अर्थ यह नहीं कि केवल एक श्लोक पढ़ना पर्याप्त है, बल्कि यह कि रामायण का प्रत्येक श्लोक इतना शक्तिशाली है कि उसका एक बार पाठ भी अमोघ पुण्य देता है। यह उन लोगों के लिए प्रोत्साहन है जो पूरी रामायण पढ़ने में असमर्थ हैं, वे कम से कम एक श्लोक तो पढ़ सकते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से, राम के नाम और गुणों का स्मरण मात्र ही पापों का नाश करता है। फिर उनके चरित्र का श्लोक पढ़ना तो और भी अधिक फलदायी है।

॥ रामनाम्नः परं पुण्यं न भूतं न भविष्यति ॥

जय श्री राम 🙏