संक्षेप रामायण – श्लोक 76
संस्कृत श्लोक
रामनामाङ्कितं लोके रामायणमिति स्मृतम् । यस्य श्रवणमात्रेण रामभक्तिः प्रजायते ॥
हिंदी अनुवाद
राम के नाम से अंकित यह रामायण लोक में प्रसिद्ध है, जिसके मात्र श्रवण से रामभक्ति उत्पन्न होती है।
अर्थ / व्याख्या
रामायण के श्रवण मात्र से रामभक्ति जाग्रत होती है।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण के श्रवण के भक्ति-फल का वर्णन करता है।
॥ श्लोक ७६ – रामायण श्रवण से रामभक्ति जाग्रत होती है ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : राम के नाम से अंकित यह रामायण लोक में प्रसिद्ध है, जिसके मात्र श्रवण से रामभक्ति उत्पन्न होती है।
🔹 English Translation : In the world, this is renowned as Ramayana, inscribed with Rama's name, by the mere hearing of which devotion to Rama arises.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| रामनामाङ्कितम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | राम के नाम से अंकित |
| लोके | पुल्लिंग, सप्तमी एकवचन | लोक में |
| रामायणम् | नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | रामायण |
| इति | अव्यय | इस प्रकार |
| स्मृतम् | भूतकृदन्त, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | स्मरण किया जाता है |
| यस्य | सर्वनाम, नपुंसकलिंग, षष्ठी एकवचन | जिसके |
| श्रवणमात्रेण | नपुंसकलिंग, तृतीया एकवचन | मात्र श्रवण से |
| रामभक्तिः | स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन | रामभक्ति |
| प्रजायते | लट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + जन्) | उत्पन्न होती है |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
रामायण का नाम ही राम के नाम से अंकित है – "राम" + "अयन" = रामायण, अर्थात् राम की यात्रा या चरित्र। इस ग्रन्थ का प्रत्येक श्लोक राम के गुणों, कर्मों और स्वरूप का वर्णन करता है। अतः इसके श्रवण मात्र से हृदय में राम के प्रति प्रेम और भक्ति उत्पन्न हो जाती है।
भक्ति का अर्थ है परमप्रेमरूपा भक्ति – राम के प्रति अनन्य प्रेम। रामायण सुनने से मनुष्य के हृदय में यह भाव जागता है, क्योंकि राम का चरित्र अत्यन्त आकर्षक और मनोहारी है। वे आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श राजा और आदर्श योद्धा हैं। उनके गुणों का श्रवण करते ही मन मुग्ध हो जाता है और भक्ति उमड़ पड़ती है।
यह श्लोक रामायण के श्रवण को भक्ति का सरलतम मार्ग बताता है।
॥ रामायणश्रवणाद् भक्तिर्जायते रघुनन्दने ॥
जय श्री राम 🙏