अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

धृष्टिर्जयन्तो विजयः सुराष्ट्रो राष्ट्रवर्धनः। अकोपो धर्मपालश्च सुमन्त्रश्चाष्टमोऽर्थवित्॥

हिंदी अनुवाद

धृष्टि, जयन्त, विजय, सुराष्ट्र, राष्ट्रवर्धन, अकोप, धर्मपाल और सुमन्त्र – ये आठ मंत्री थे। सुमन्त्र आठवें थे और अर्थवित् (अर्थशास्त्र के ज्ञाता) थे।

अर्थ / व्याख्या

इस श्लोक में राजा दशरथ के आठ मंत्रियों के नाम दिए गए हैं। इनमें सुमन्त्र को आठवाँ और अर्थशास्त्र का ज्ञाता बताया गया है।

टिप्पणी

ये नाम उनके व्यक्तित्व के गुणों को भी दर्शाते हैं – जैसे धृष्टि (साहसी), जयन्त (विजयशील), विजय, सुराष्ट्र (सुशासित राष्ट्र वाला), राष्ट्रवर्धन (राष्ट्र को बढ़ाने वाला), अकोप (क्रोधरहित), धर्मपाल (धर्म की रक्षा करने वाला), और सुमन्त्र (मंत्रणा में कुशल)।

॥ श्री रामायण बालकाण्ड अध्याय ७ श्लोक ३ ॥

धृष्टिर्जयन्तो विजयः सुराष्ट्रो राष्ट्रवर्धनः। अकोपो धर्मपालश्च सुमन्त्रश्चाष्टमोऽर्थवित्॥
dhṛṣṭir jayanto vijayaḥ surāṣṭro rāṣṭravardhanaḥ | akopo dharmapālaśca sumantraścāṣṭamo'rthavit ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : धृष्टि, जयन्त, विजय, सुराष्ट्र, राष्ट्रवर्धन, अकोप, धर्मपाल और सुमन्त्र – ये आठ मंत्री थे। सुमन्त्र आठवें थे और अर्थवित् (अर्थशास्त्र के ज्ञाता) थे।

🔹 English Translation : Dhrishti, Jayanta, Vijaya, Surashtra, Rashtravardhana, Akopa, Dharmapala, and Sumantra – these were the eight ministers. Sumantra was the eighth and a knower of polity (economics).

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
धृष्टिःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनधृष्टि (नाम)
जयन्तःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजयन्त (नाम)
विजयःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनविजय (नाम)
सुराष्ट्रःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसुराष्ट्र (नाम)
राष्ट्रवर्धनःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराष्ट्रवर्धन (नाम)
अकोपःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनअकोप (नाम)
धर्मपालःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनधर्मपाल (नाम)
अव्ययऔर
सुमन्त्रःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसुमन्त्र (नाम)
अव्ययऔर
अष्टमःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (संख्या)आठवाँ
अर्थवित्पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (अर्थ + विद्)अर्थशास्त्र का ज्ञाता, नीतिकुशल

📖 श्लोक का विस्तृत अर्थ एवं व्याख्या

तीसरे श्लोक में राजा दशरथ के आठ मंत्रियों के नामों की सूची दी गई है। ये नाम हैं – धृष्टि, जयन्त, विजय, सुराष्ट्र, राष्ट्रवर्धन, अकोप, धर्मपाल और सुमन्त्र। इनमें सुमन्त्र को आठवाँ और 'अर्थवित्' (अर्थशास्त्र का ज्ञाता) कहा गया है। रामायण में सुमन्त्र का विशेष रूप से उल्लेख मिलता है; वे राजा दशरथ के प्रिय सारथि और मंत्री थे, जो हर महत्वपूर्ण अवसर पर राजा को सलाह देते थे।

अन्य मंत्रियों के नाम भी सार्थक हैं – धृष्टि (साहसी), जयन्त (विजयी), विजय (जीत), सुराष्ट्र (अच्छे राज्य वाला), राष्ट्रवर्धन (राष्ट्र को बढ़ाने वाला), अकोप (क्रोधरहित), धर्मपाल (धर्म की रक्षा करने वाला)। ये नाम उनके व्यक्तित्व के गुणों को भी इंगित करते हैं। इस प्रकार दशरथ की मंत्रिपरिषद में विभिन्न क्षमताओं के विशेषज्ञ थे – कोई साहस में, कोई विजय में, कोई प्रशासन में, कोई धर्म में, और कोई अर्थशास्त्र में। यह एक आदर्श मंत्रिमंडल का उदाहरण है।

सुमन्त्र को 'अर्थवित्' कहना विशेष महत्व रखता है। अर्थशास्त्र केवल धन तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीति, कूटनीति और समाज के संचालन का शास्त्र है। सुमन्त्र की यह विशेषता आगे की कथा में भी दिखती है, जब वे राजा को उचित सलाह देते हैं।

📚 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संदर्भ

प्राचीन भारत में मंत्रियों के नाम उनके गुणों के अनुसार रखे जाते थे। यहाँ दिए गए नाम संस्कृत के सामान्य नाम भी हैं और गुणवाचक भी। इससे यह भी पता चलता है कि राजा दशरथ ने योग्यता के आधार पर मंत्रियों का चयन किया था।

सुमन्त्र का उल्लेख आगे चलकर राम के वनवास प्रसंग में भी आता है, जब वे राम को वन जाने की सूचना देते हैं और उन्हें समझाते हैं। उनकी निष्ठा और ज्ञान सदैव सराहनीय रहा।

✨ विशेष: इस श्लोक से हमें यह शिक्षा मिलती है कि एक सफल शासन के लिए विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। केवल एक ही क्षेत्र के जानकार मंत्री पर्याप्त नहीं होते। इस मंत्रिपरिषद में साहस, विजय, प्रशासन, धर्म और अर्थ – सभी पक्षों के विशेषज्ञ थे।
॥ जय श्री राम ॥