संक्षेप रामायण – श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञो धनुर्वेदे च निष्ठितः। सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञः स्मृतिमान् प्रतिभानवान्॥

हिंदी अनुवाद

वे वेद और वेदांगों के तत्त्व को जानने वाले, धनुर्वेद में निष्णात, सभी शास्त्रों के अर्थ तत्त्व को जानने वाले, स्मृतिमान् और प्रतिभाशाली हैं।

अर्थ / व्याख्या

राम की विद्वत्ता एवं शास्त्रज्ञान का वर्णन।

टिप्पणी

यह श्लोक राम को एक आदर्श राजा एवं योद्धा के रूप में स्थापित करता है, जो शास्त्रों का ज्ञाता एवं धनुर्विद्या में निपुण है।

॥ श्लोक ९ ॥

वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञो धनुर्वेदे च निष्ठितः। सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञः स्मृतिमान् प्रतिभानवान्॥
vedavedāṅgatattvajño dhanurvede ca niṣṭhitaḥ | sarvaśāstrārthatattvajñaḥ smṛtimān pratibhānavān ||

🔹 हिन्दी : वेद और वेदांगों के तत्त्व को जानने वाले, धनुर्वेद में निष्णात, सभी शास्त्रों के अर्थ तत्त्व को जानने वाले, स्मृतिमान् और प्रतिभाशाली हैं।

🔹 English : He knows the essence of the Vedas and Vedangas, is proficient in Dhanurveda, knows the true meaning of all scriptures, has sharp memory, and is gifted with brilliance.

🔍 शब्दार्थ

संस्कृतहिन्दी अर्थ
वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञःवेद और वेदांगों के तत्त्व को जानने वाला
धनुर्वेदेधनुर्वेद में
और
निष्ठितःनिष्णात
सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञःसभी शास्त्रों के अर्थ के तत्त्व को जानने वाला
स्मृतिमान्स्मरणशक्ति वाला
प्रतिभानवान्प्रतिभाशाली

धनुर्वेद केवल युद्ध कला नहीं, बल्कि आत्मरक्षा और धर्मरक्षा का विज्ञान है। राम इसके प्रकांड पंडित हैं।