संक्षेप रामायण – श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

महोरस्को महाबाहुः सिंहविक्रान्तगामी च। महासत्त्वो महातेजा नित्यः सर्वगुणान्वितः॥

हिंदी अनुवाद

वे विशाल वक्षःस्थल वाले, लंबी भुजाओं वाले, सिंह के समान विक्रांत गति वाले, महासत्त्व (महान सत्वगुण से युक्त), महातेजस्वी और सदा सभी गुणों से संपन्न हैं।

अर्थ / व्याख्या

राम के शारीरिक, गाम्भीर्य एवं तेजोगुण का वर्णन।

टिप्पणी

इस श्लोक में राम के बाह्य एवं आंतरिक ऐश्वर्य का वर्णन है। "महासत्त्व" उनके सात्विक स्वभाव को दर्शाता है।

॥ श्लोक ८ ॥

महोरस्को महाबाहुः सिंहविक्रान्तगामी च। महासत्त्वो महातेजा नित्यः सर्वगुणान्वितः॥
mahorasko mahābāhuḥ siṃhavikrāntagāmī ca | mahāsattvo mahātejā nityaḥ sarvaguṇānvitaḥ ||

🔹 हिन्दी : विशाल वक्षःस्थल वाले, लंबी भुजाओं वाले, सिंह के समान विक्रांत गति वाले, महासत्त्व, महातेजस्वी और सदा सभी गुणों से संपन्न हैं।

🔹 English : Broad chest, long arms, walks with the gait of a lion, of great essence, supremely brilliant, and eternally endowed with all virtues.

🔍 शब्दार्थ

संस्कृतहिन्दी अर्थ
महोरस्कःविशाल वक्ष वाला
महाबाहुःलंबी भुजाओं वाला
सिंहविक्रान्तगामीसिंह के समान विक्रांत गति वाला
और
महासत्त्वःमहान सत्त्वगुण से युक्त
महातेजाःमहान तेजस्वी
नित्यःसदा
सर्वगुणान्वितःसभी गुणों से युक्त

यहाँ राम के गज-गामी न होकर सिंह के समान गति वाले कहा गया है, जो उनके राजसी एवं वीरतापूर्ण व्यक्तित्व को दर्शाता है।