संक्षेप रामायण – श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
बुद्धिमान् नीतिमान् वाग्मी श्रीमान् शत्रुनिबर्हणः। विपुलांसो महाबाहुः कम्बुग्रीवो महाहनुः॥
हिंदी अनुवाद
वे बुद्धिमान्, नीतिज्ञ, वक्ता, श्रीमान्, शत्रुओं का नाश करने वाले, विशाल कंधों वाले, लंबी भुजाओं वाले, शंख के समान ग्रीवा वाले एवं विशाल हनु (ठोढी) वाले हैं।
अर्थ / व्याख्या
राम के बौद्धिक, नैतिक, वाक् एवं शारीरिक गुणों का वर्णन।
टिप्पणी
इस श्लोक में राम के लक्षणों का विस्तार से वर्णन है। "महाबाहु" कहना उनकी रक्षण क्षमता को दर्शाता है।
॥ श्लोक ७ ॥
🔹 हिन्दी : बुद्धिमान्, नीतिज्ञ, वक्ता, श्रीमान्, शत्रुओं का नाश करने वाले, विशाल कंधों वाले, लंबी भुजाओं वाले, शंख के समान ग्रीवा वाले एवं विशाल हनु वाले हैं।
🔹 English : Intelligent, righteous in conduct, eloquent, prosperous, destroyer of enemies, broad-shouldered, long-armed, with a neck like a conch, and a prominent chin.
🔍 शब्दार्थ
| संस्कृत | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| बुद्धिमान् | बुद्धिमान |
| नीतिमान् | नीति में स्थित |
| वाग्मी | वक्ता |
| श्रीमान् | ऐश्वर्यशाली |
| शत्रुनिबर्हणः | शत्रुओं का नाश करने वाला |
| विपुलांसः | विशाल कंधों वाला |
| महाबाहुः | लंबी भुजाओं वाला |
| कम्बुग्रीवः | शंख के समान ग्रीवा |
| महाहनुः | बड़ी ठोढी वाला |
यह श्लोक राम के शारीरिक एवं मानसिक गुणों का अद्भुत सम्मिश्रण प्रस्तुत करता है। शत्रुनिबर्हणः से उनकी वीरता और बुद्धिमान् से उनकी प्रज्ञा प्रकट होती है।