संक्षेप रामायण – श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

रक्षिता जीवलोकस्य धर्मस्य परिरक्षिता। वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञः सर्वशास्त्रार्थकोविदः॥

हिंदी अनुवाद

वे जीवलोक के रक्षक, धर्म के परिरक्षक, वेद-वेदांग के तत्त्वज्ञ और सभी शास्त्रों के अर्थ के कोविद (पारंगत) हैं।

अर्थ / व्याख्या

राम के लोकरक्षण, धर्मरक्षण एवं शास्त्रज्ञान का वर्णन।

टिप्पणी

यह श्लोक राम के राजधर्म एवं वैदिक ज्ञान दोनों को उजागर करता है।

॥ श्लोक १४ ॥

रक्षिता जीवलोकस्य धर्मस्य परिरक्षिता। वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञः सर्वशास्त्रार्थकोविदः॥
rakṣitā jīvalokasya dharmasya parirakṣitā | vedavedāṅgatattvajñaḥ sarvaśāstrārthakovidaḥ ||

🔹 हिन्दी : जीवलोक के रक्षक, धर्म के परिरक्षक, वेद-वेदांग के तत्त्वज्ञ और सभी शास्त्रों के अर्थ के कोविद हैं।

🔹 English : Protector of the world of living beings, guardian of righteousness, knower of the essence of Vedas and Vedangas, proficient in the meaning of all scriptures.

🔍 शब्दार्थ

संस्कृतहिन्दी अर्थ
रक्षितारक्षक
जीवलोकस्यजीवों के लोक की
धर्मस्यधर्म की
परिरक्षितापरिरक्षक
वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञःवेद-वेदांग के तत्त्वज्ञ
सर्वशास्त्रार्थकोविदःसभी शास्त्रों के अर्थ में पारंगत

यहाँ "परिरक्षिता" का अर्थ है धर्म की सर्वतोभावेन रक्षा करने वाला। राम धर्म के मूल स्रोत हैं।