संक्षेप रामायण – श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
धर्मज्ञः सत्यसन्धश्च प्रजानां च हिते रतः। यशस्वी ज्ञानसम्पन्नः शुचिर्वश्यः समाधिमान्॥
हिंदी अनुवाद
वे धर्मज्ञ, सत्यप्रतिज्ञ, प्रजा के हित में रत, यशस्वी, ज्ञानसम्पन्न, पवित्र, वश्य (सबके वश में करने वाले) और समाधिमान् (एकाग्रचित्त) हैं।
अर्थ / व्याख्या
राम के धार्मिक, नैतिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक गुणों का वर्णन।
टिप्पणी
यहाँ "वश्य" का अर्थ है कि वे सबको अपने वश में कर लेते हैं, अर्थात् सब उनसे प्रेम करते हैं।
॥ श्लोक १३ ॥
🔹 हिन्दी : धर्मज्ञ, सत्यप्रतिज्ञ, प्रजा के हित में रत, यशस्वी, ज्ञानसम्पन्न, पवित्र, वश्य और समाधिमान् हैं।
🔹 English : Knows righteousness, true to his pledge, engaged in the welfare of his people, illustrious, endowed with wisdom, pure, charming, and meditative.
🔍 शब्दार्थ
| संस्कृत | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| धर्मज्ञः | धर्म को जानने वाला |
| सत्यसन्धः | सत्यप्रतिज्ञ |
| च | और |
| प्रजानाम् | प्रजा की |
| हिते | हित में |
| रतः | रत |
| यशस्वी | यशस्वी |
| ज्ञानसम्पन्नः | ज्ञान से सम्पन्न |
| शुचिः | पवित्र |
| वश्यः | सबके वश में करने वाला |
| समाधिमान् | समाधि वाला / एकाग्रचित्त |
इस श्लोक में राम के आठ गुणों का उल्लेख है, जो एक आदर्श पुरुष के लक्षण हैं।