अध्याय 1: संक्षेप रामायण
श्लोक 15
संक्षेप रामायण – श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
आदिपुरुषः साक्षात् परमात्मा नराकृतिः। अवतीर्णः कृपासिन्धुः रामचन्द्रः सनातनः॥
हिंदी अनुवाद
वे साक्षात् आदिपुरुष, परमात्मा, मनुष्य रूप में अवतीर्ण, कृपा के सागर एवं सनातन रामचन्द्र हैं।
अर्थ / व्याख्या
राम के दिव्य स्वरूप एवं अवतार का वर्णन।
टिप्पणी
यह श्लोक राम के दिव्यत्व को प्रकट करता है। वे नर रूप में नारायण हैं।
॥ श्लोक १५ ॥
आदिपुरुषः साक्षात् परमात्मा नराकृतिः। अवतीर्णः कृपासिन्धुः रामचन्द्रः सनातनः॥
ādipuruṣaḥ sākṣāt paramātmā narākṛtiḥ | avatīrṇaḥ kṛpāsindhuḥ rāmacandraḥ sanātanaḥ ||
🔹 हिन्दी : साक्षात् आदिपुरुष, परमात्मा, मनुष्य रूप में अवतीर्ण, कृपा के सागर एवं सनातन रामचन्द्र हैं।
🔹 English : He is the primeval Lord Himself, the Supreme Soul incarnate in human form, an ocean of compassion, and the eternal Ramachandra.
🔍 शब्दार्थ
| संस्कृत | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| आदिपुरुषः | आदि पुरुष |
| साक्षात् | साक्षात् |
| परमात्मा | परमात्मा |
| नराकृतिः | मनुष्य रूप |
| अवतीर्णः | अवतीर्ण |
| कृपासिन्धुः | कृपा के सागर |
| रामचन्द्रः | रामचन्द्र |
| सनातनः | सनातन |
यह श्लोक राम के दिव्य स्वरूप को उद्घाटित करता है। वे साक्षात् विष्णु के अवतार हैं, जो कृपा बरसाने के लिए मनुष्य रूप में प्रकट हुए।