संक्षेप रामायण – श्लोक 91

संस्कृत श्लोक

प्रथमे सर्गमाहात्म्यं शृणुयाद्यः सदा नरः । स रामभक्तिं लभते रामलोकं च गच्छति ॥

हिंदी अनुवाद

जो मनुष्य प्रथम सर्ग की महिमा को सदा सुनता है, वह रामभक्ति प्राप्त करता है और रामलोक को जाता है।

अर्थ / व्याख्या

प्रथम सर्ग के माहात्म्य को सुनने से रामभक्ति और रामलोक की प्राप्ति होती है।

टिप्पणी

यह श्लोक प्रथम सर्ग की महिमा का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ९१ – प्रथम सर्ग की महिमा ॥

प्रथमे सर्गमाहात्म्यं शृणुयाद्यः सदा नरः । स रामभक्तिं लभते रामलोकं च गच्छति ॥
prathame sargamāhātmyaṃ śṛṇuyādyaḥ sadā naraḥ | sa rāmabhaktiṃ labhate rāmalokaṃ ca gacchati ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : जो मनुष्य प्रथम सर्ग की महिमा को सदा सुनता है, वह रामभक्ति प्राप्त करता है और रामलोक को जाता है।

🔹 English Translation : The man who always hears the glory of the first chapter obtains devotion to Rama and goes to the realm of Rama.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
प्रथमेविशेषण, पुल्लिंग, सप्तमी एकवचनप्रथम
सर्गमाहात्म्यम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन (सर्ग + माहात्म्य)सर्ग की महिमा को
शृणुयात्विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (श्रु धातु)सुने
यःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजो
सदाअव्ययसदा
नरःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमनुष्य
सःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनवह
रामभक्तिम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनरामभक्ति
लभतेलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (लभ् धातु)प्राप्त करता है
रामलोकम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनरामलोक को
अव्ययऔर
गच्छतिलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (गम् धातु)जाता है

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक संक्षेप रामायण के प्रथम सर्ग के माहात्म्य का वर्णन करता है। इस सर्ग में नारद जी ने राम के सम्पूर्ण जीवन चरित्र का संक्षेप में वर्णन किया है। इस सर्ग की महिमा को सुनने से मनुष्य को रामभक्ति प्राप्त होती है और अन्त में रामलोक की प्राप्ति होती है। यह सर्ग सम्पूर्ण रामायण का सार है, इसलिए इसका महत्व अत्यधिक है।

रामभक्ति का अर्थ है राम के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण। यह भक्ति ही मोक्ष का मार्ग है। रामलोक की प्राप्ति का अर्थ है जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति।

आध्यात्मिक दृष्टि से, प्रथम सर्ग रामकथा का बीज है। इस बीज को हृदय में सींचने से भक्ति का वृक्ष विकसित होता है और अन्त में मोक्ष का फल मिलता है।

॥ प्रथमसर्गमाहात्म्यं रामभक्तिप्रदं नृणाम् ॥

जय श्री राम 🙏