संक्षेप रामायण – श्लोक 90

संस्कृत श्लोक

इति संक्षेपरामायं प्रथमः सर्ग उच्यते । यस्य श्रवणमात्रेण पापं नश्यति तत्क्षणात् ॥

हिंदी अनुवाद

इस प्रकार संक्षेप रामायण का प्रथम सर्ग कहा जाता है, जिसके मात्र श्रवण मात्र से पाप तत्क्षण नष्ट हो जाता है।

अर्थ / व्याख्या

संक्षेप रामायण के प्रथम सर्ग का समापन और उसकी महिमा।

टिप्पणी

यह श्लोक संक्षेप रामायण के प्रथम सर्ग के समापन और उसकी महिमा का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ९० – संक्षेप रामायण प्रथम सर्ग का समापन और महिमा ॥

इति संक्षेपरामायं प्रथमः सर्ग उच्यते । यस्य श्रवणमात्रेण पापं नश्यति तत्क्षणात् ॥
iti saṃkṣeparāmāyaṃ prathamaḥ sarga ucyate | yasya śravaṇamātreṇa pāpaṃ naśyati tatkṣaṇāt ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : इस प्रकार संक्षेप रामायण का प्रथम सर्ग कहा जाता है, जिसके मात्र श्रवण मात्र से पाप तत्क्षण नष्ट हो जाता है।

🔹 English Translation : Thus is spoken the first chapter of the Sankshepa Ramayana, by the mere hearing of which sin perishes instantly.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
इतिअव्ययइस प्रकार
संक्षेपरामायम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनसंक्षेप रामायण
प्रथमःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनप्रथम
सर्गःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसर्ग
उच्यतेलट्लकार कर्मणि, प्रथमपुरुष एकवचन (वच् धातु)कहा जाता है
यस्यसर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचनजिसके
श्रवणमात्रेणनपुंसकलिंग, तृतीया एकवचनमात्र श्रवण से
पापम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनपाप
नश्यतिलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (नश् धातु)नष्ट होता है
तत्क्षणात्अव्ययतत्क्षण

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक बालकाण्ड के प्रथम सर्ग (संक्षेप रामायण) का समापन करता है। इस सर्ग में नारद जी ने राम के सम्पूर्ण जीवन चरित्र का संक्षेप में वर्णन किया था – जन्म से लेकर राज्याभिषेक और अन्त में स्वर्गारोहण तक। अब इस सर्ग की महिमा बताई गई है कि इसके श्रवण मात्र से पाप तत्क्षण नष्ट हो जाता है।

"तत्क्षणात्" शब्द अत्यन्त महत्वपूर्ण है – पाप नष्ट होने में देर नहीं लगती, तुरन्त ही प्रभाव होता है। यह रामायण की तात्कालिक शक्ति को दर्शाता है।

इस प्रकार बालकाण्ड का प्रथम सर्ग समाप्त होता है। अब आगे के सर्गों में वाल्मीकि और नारद के संवाद, वाल्मीकि को ब्रह्मा का वरदान, और रामायण रचना का विस्तार आएगा।

आध्यात्मिक दृष्टि से, यह सर्ग रामकथा का बीज है, जिसे सुनने मात्र से व्यक्ति पवित्र हो जाता है।

॥ इति बालकाण्डे प्रथमः सर्गः ॥

ॐ तत्सदिति श्रीमद्रामायणे बालकाण्डे प्रथमः सर्गः ॥

जय श्री राम 🙏