संक्षेप रामायण – श्लोक 93

संस्कृत श्लोक

प्रथमे सर्गमाहात्म्यं सर्वविघ्नविनाशनम् । रामप्रसादजननं सर्वसम्पत्करं शुभम् ॥

हिंदी अनुवाद

प्रथम सर्ग की महिमा सभी विघ्नों का नाश करने वाली, राम की कृपा उत्पन्न करने वाली, सभी सम्पत्तियाँ देने वाली और शुभ है।

अर्थ / व्याख्या

प्रथम सर्ग की महिमा के गुण – विघ्ननाश, रामकृपा, सर्वसम्पत्कर, शुभ।

टिप्पणी

यह श्लोक प्रथम सर्ग के गुणों का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ९३ – प्रथम सर्ग के गुण – विघ्ननाश, रामकृपा, सम्पत्ति ॥

प्रथमे सर्गमाहात्म्यं सर्वविघ्नविनाशनम् । रामप्रसादजननं सर्वसम्पत्करं शुभम् ॥
prathame sargamāhātmyaṃ sarvavighnavināśanam | rāmaprasādajananaṃ sarvasampatkaraṃ śubham ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : प्रथम सर्ग की महिमा सभी विघ्नों का नाश करने वाली, राम की कृपा उत्पन्न करने वाली, सभी सम्पत्तियाँ देने वाली और शुभ है।

🔹 English Translation : The glory of the first chapter destroys all obstacles, generates the grace of Rama, bestows all riches, and is auspicious.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
प्रथमेविशेषण, पुल्लिंग, सप्तमी एकवचनप्रथम
सर्गमाहात्म्यम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनसर्ग की महिमा
सर्वविघ्नविनाशनम्विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनसभी विघ्नों का नाश करने वाली
रामप्रसादजननम्विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनराम की कृपा उत्पन्न करने वाली
सर्वसम्पत्करम्विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनसभी सम्पत्तियाँ देने वाली
शुभम्विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनशुभ

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक प्रथम सर्ग के चार गुण बताता है: सर्वविघ्नविनाशनम् (सभी विघ्न-बाधाओं का नाश करने वाला), रामप्रसादजननम् (राम की कृपा उत्पन्न करने वाला), सर्वसम्पत्करम् (सभी प्रकार की सम्पत्तियाँ देने वाला), और शुभम् (मंगलकारी)। यह सर्ग इतना शक्तिशाली है कि इसके श्रवण-कीर्तन से जीवन की सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं, राम की कृपा प्राप्त होती है, और धन-धान्य आदि सभी सम्पत्तियाँ मिलती हैं।

विघ्न-नाश का अर्थ है कि कार्यों में आने वाली बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं। रामप्रसाद का अर्थ है राम की अनुकम्पा, जो सबसे बड़ी सम्पत्ति है। सर्वसम्पत्ति का अर्थ है भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की समृद्धि। और शुभम् का अर्थ है कि यह सदा मंगलकारी है, कभी अमंगल नहीं लाता।

आध्यात्मिक दृष्टि से, प्रथम सर्ग का श्रवण मन को इतना पवित्र कर देता है कि सभी प्रकार की बाधाएँ स्वतः दूर हो जाती हैं।

॥ प्रथमसर्गमाहात्म्यं सर्वविघ्नविनाशनम् ॥

जय श्री राम 🙏