संक्षेप रामायण – श्लोक 94

संस्कृत श्लोक

कलियुगे पापबहुले रामायणकथा शुभा । नराणां मुक्तिदा प्रोक्ता प्रथमसर्ग एव च ॥

हिंदी अनुवाद

पापबहुल कलियुग में रामायण की शुभ कथा मनुष्यों के लिए मुक्तिदायिनी कही गई है, और विशेष रूप से प्रथम सर्ग ही (मुक्तिदायक है)।

अर्थ / व्याख्या

कलियुग में रामायण कथा और विशेष रूप से प्रथम सर्ग मुक्तिदायक है।

टिप्पणी

यह श्लोक कलियुग में रामायण और प्रथम सर्ग के महत्व को बताता है।

॥ श्लोक ९४ – कलियुग में प्रथम सर्ग की मुक्तिदायिनी महिमा ॥

कलियुगे पापबहुले रामायणकथा शुभा । नराणां मुक्तिदा प्रोक्ता प्रथमसर्ग एव च ॥
kaliyuge pāpabahule rāmāyaṇakathā śubhā | narāṇāṃ muktidā proktā prathamasarga eva ca ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : पापबहुल कलियुग में रामायण की शुभ कथा मनुष्यों के लिए मुक्तिदायिनी कही गई है, और विशेष रूप से प्रथम सर्ग ही (मुक्तिदायक है)।

🔹 English Translation : In the Kali Yuga, abounding in sin, the auspicious story of the Ramayana is declared to be bestowing liberation to men, and especially the first chapter itself.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
कलियुगेपुल्लिंग, सप्तमी एकवचनकलियुग में
पापबहुलेविशेषण, पुल्लिंग, सप्तमी एकवचनपाप से बहुल
रामायणकथास्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनरामायण की कथा
शुभाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनशुभ
नराणाम्पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनमनुष्यों के लिए
मुक्तिदाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनमुक्ति देने वाली
प्रोक्ताभूतकृदन्त, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनकही गई है
प्रथमसर्गःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनप्रथम सर्ग
एवअव्ययही
अव्ययऔर

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक विशेष रूप से कलियुग के संदर्भ में रामायण के महत्व को रेखांकित करता है। कलियुग को पापबहुल (पापों से भरा हुआ) कहा गया है। इस युग में धर्म की हानि होती है, लोग अधर्म की ओर प्रवृत्त होते हैं। ऐसे में रामायण की शुभ कथा ही मनुष्यों को मुक्ति दिला सकती है। विशेष रूप से प्रथम सर्ग (संक्षेप रामायण) को मुक्तिदायक बताया गया है।

यह श्लोक कलियुग के लोगों को प्रोत्साहित करता है कि वे रामायण का श्रवण-कीर्तन करें। यद्यपि कलियुग में यज्ञ-दान-तप करना कठिन है, रामायण का पाठ सुलभ है। इससे भी मुक्ति मिल सकती है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, कलियुग में भगवान् के नाम-कीर्तन को सर्वोच्च साधन माना गया है। रामायण में राम के नाम और गुणों का वर्णन है, इसलिए यह कलियुग के लिए सर्वोत्तम साधन है।

॥ कलियुगे रामकथा मुक्तिदा नृणाम् ॥

जय श्री राम 🙏