अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

दीर्घायुषो नराः सर्वे धार्मिकाः सत्यवादिनः। न तेषां विद्यते दुःखं सर्वे सुखमयाः प्रजाः॥

हिंदी अनुवाद

सभी मनुष्य दीर्घायु, धार्मिक और सत्यवादी थे। उन्हें किसी प्रकार का दुःख नहीं था, सभी प्रजाजन सुखमय थे।

अर्थ / व्याख्या

सभी नर दीर्घायु, धार्मिक और सत्यवादी थे। उन्हें कोई दुःख नहीं था, सारी प्रजा सुखी थी।

टिप्पणी

यह श्लोक प्रजा की समृद्धि और सुख का वर्णन करता है। दीर्घायु, धर्म, सत्य और दुःख का अभाव – ये रामराज्य के लक्षण हैं।

श्लोक २९: प्रजा की सुख-समृद्धि

दीर्घायुषो नराः सर्वे धार्मिकाः सत्यवादिनः।
न तेषां विद्यते दुःखं सर्वे सुखमयाः प्रजाः॥
dīrghāyuṣo narāḥ sarve dhārmikāḥ satyavādinaḥ | na teṣāṃ vidyate duḥkhaṃ sarve sukhamayāḥ prajāḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : सभी मनुष्य दीर्घायु, धार्मिक और सत्यवादी थे। उन्हें किसी प्रकार का दुःख नहीं था, सभी प्रजाजन सुखमय थे।

🔹 English Translation : All men were long-lived, righteous and truthful. They had no sorrow; all subjects were full of happiness.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
दीर्घायुषःविशेषण, प्रथमा बहुवचनदीर्घ आयु वाले
नराःपुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनमनुष्य
सर्वेसर्वनाम, प्रथमा बहुवचनसभी
धार्मिकाःविशेषण, प्रथमा बहुवचनधार्मिक, धर्मपरायण
सत्यवादिनःविशेषण, प्रथमा बहुवचनसत्य बोलने वाले
अव्ययनहीं
तेषाम्सर्वनाम, षष्ठी बहुवचनउनको
विद्यतेआत्मनेपद, लट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचनहै, विद्यमान है
दुःखम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनदुःख
सर्वेसर्वनाम, प्रथमा बहुवचनसभी
सुखमयाःविशेषण, प्रथमा बहुवचनसुख से भरे हुए, सुखमय
प्रजाःस्त्रीलिंग, प्रथमा बहुवचनप्रजा के लोग

📜 व्याख्या एवं महत्त्व

यह श्लोक रामराज्य की सर्वोत्कृष्ट स्थिति का वर्णन करता है। प्रजा के चार मुख्य गुण बताए गए हैं – दीर्घायु (स्वास्थ्य), धार्मिकता (नैतिकता), सत्यवादिता (ईमानदारी) और दुःख का अभाव (संतोष)। ये सभी एक आदर्श समाज के लक्षण हैं।

दीर्घायुषः – लोग लंबी आयु जीते थे, जिसका अर्थ है कि वातावरण शुद्ध था, रोग नहीं थे, और लोग संतुलित जीवन जीते थे। धार्मिकाः – वे धर्म के अनुसार आचरण करते थे। सत्यवादिनः – वे सत्य बोलते थे, जो सामाजिक विश्वास का आधार है। न तेषां विद्यते दुःखम् – उन्हें कोई दुःख नहीं था, अर्थात् आर्थिक, सामाजिक या पारिवारिक समस्याएँ नहीं थीं। सर्वे सुखमयाः – सभी सुखी थे।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

यह श्लोक हमें बताता है कि सच्चा सुख धर्म और सत्य पर आधारित जीवन में है। जब समाज के सभी लोग धर्मपरायण और सत्यवादी होते हैं, तो वातावरण में दुःख के लिए स्थान नहीं रहता। हमें अपने जीवन में भी इन गुणों को धारण करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हम सुखी रह सकें।

॥ न तेषां विद्यते दुःखं सर्वे सुखमयाः प्रजाः ॥

जय श्री राम 🙏