अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

सर्वे रामगुणैर्युक्ताः प्रजा धर्मपरायणाः। वर्णाश्रमाणां सर्वेषां यथाशास्त्रं प्रवर्तिनाम्॥

हिंदी अनुवाद

सभी प्रजाजन राम के समान गुणों से युक्त, धर्मपरायण और सभी वर्णों तथा आश्रमों के लोग शास्त्रानुसार आचरण करने वाले थे।

अर्थ / व्याख्या

प्रजा राम के समान गुणवान, धर्मपरायण और सभी वर्णाश्रम शास्त्रानुसार आचरण करने वाले थे।

टिप्पणी

यह श्लोक प्रजा की उच्च कोटि को दर्शाता है। वे राम के समान गुणों से युक्त थे, अर्थात् राम के आदर्श उनमें भी थे।

श्लोक २८: प्रजा के गुण

सर्वे रामगुणैर्युक्ताः प्रजा धर्मपरायणाः।
वर्णाश्रमाणां सर्वेषां यथाशास्त्रं प्रवर्तिनाम्॥
sarve rāmaguṇairyuktāḥ prajā dharmaparāyaṇāḥ | varṇāśramāṇāṃ sarveṣāṃ yathāśāstraṃ pravartinām ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : सभी प्रजाजन राम के समान गुणों से युक्त, धर्मपरायण और सभी वर्णों तथा आश्रमों के लोग शास्त्रानुसार आचरण करने वाले थे।

🔹 English Translation : All the subjects were endowed with virtues like Rama, devoted to righteousness, and people of all varnas and ashramas acted according to the scriptures.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
सर्वेसर्वनाम, प्रथमा बहुवचनसभी
रामगुणैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनराम के समान गुणों से
युक्ताःविशेषण, प्रथमा बहुवचनयुक्त, सहित
प्रजाःस्त्रीलिंग, प्रथमा बहुवचनप्रजा के लोग
धर्मपरायणाःविशेषण, प्रथमा बहुवचनधर्म में तत्पर, धर्मनिष्ठ
वर्णाश्रमाणाम्पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनवर्णों और आश्रमों के
सर्वेषाम्सर्वनाम, षष्ठी बहुवचनसभी के
यथाशास्त्रम्अव्ययशास्त्र के अनुसार
प्रवर्तिनाम्विशेषण, षष्ठी बहुवचनआचरण करने वालों के

📜 व्याख्या एवं महत्त्व

इस श्लोक में प्रजा के चरित्र का वर्णन है। "रामगुणैः" का अर्थ है राम के समान गुण – सत्य, धर्म, पराक्रम, दया आदि। यहाँ राम का नाम आना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बालकाण्ड है और राम की कथा अभी आरम्भ नहीं हुई है, परन्तु यह पूर्वाभास कराता है कि राम के गुण कैसे होंगे। प्रजा भी उन्हीं गुणों से युक्त थी – यह दर्शाता है कि राजा और प्रजा में एकात्मता थी।

दूसरे भाग में कहा गया है कि सभी वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) और आश्रम (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास) के लोग शास्त्रानुसार आचरण करते थे। यह सामाजिक व्यवस्था की सुदृढ़ता को दर्शाता है।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

यह श्लोक सिखाता है कि एक आदर्श समाज वह है जहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपने वर्णाश्रम धर्म का पालन करता है और सभी में सद्गुण विद्यमान हों। राम के गुण सार्वभौमिक हैं – हम सभी को उन गुणों को धारण करने का प्रयास करना चाहिए।

॥ सर्वे रामगुणैर्युक्ताः प्रजा धर्मपरायणाः ॥

जय श्री राम 🙏