अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

सीमापि विवदन्ते न न च व्याला विकुर्वते। न चापि म्रियते बालो न दम्पतिविरोधनम्॥

हिंदी अनुवाद

सीमा को लेकर लोग झगड़ा नहीं करते थे, न ही हिंसक पशु उपद्रव करते थे, न ही बालक मरते थे, और न ही पति-पत्नी में विरोध होता था।

अर्थ / व्याख्या

राज्य में सीमा विवाद नहीं थे, जंगली जानवर आक्रामक नहीं होते थे, बाल मृत्यु नहीं होती थी, और दांपत्य जीवन में कलह नहीं थी।

टिप्पणी

यह श्लोक प्रकृति और समाज के बीच सामंजस्य को दर्शाता है। राजा के धार्मिक शासन का प्रभाव सम्पूर्ण सृष्टि पर पड़ता है।

श्लोक २७: सीमा विवाद, हिंसक पशु एवं पारिवारिक कलह से मुक्ति

सीमापि विवदन्ते न न च व्याला विकुर्वते।
न चापि म्रियते बालो न दम्पतिविरोधनम्॥
sīmāpi vivadante na na ca vyālā vikurvate | na cāpi mriyate bālo na dampativirodhanam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : सीमा को लेकर लोग झगड़ा नहीं करते थे, न ही हिंसक पशु उपद्रव करते थे, न ही बालक मरते थे, और न ही पति-पत्नी में विरोध होता था।

🔹 English Translation : People did not quarrel over boundaries, nor did wild animals become ferocious; children did not die, and there was no discord between husband and wife.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
सीमास्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनसीमा, भूमि की सीमा
अपिअव्ययभी
विवदन्तेआत्मनेपद, लट्लकार, प्रथमपुरुष बहुवचनझगड़ते हैं, विवाद करते हैं
अव्ययनहीं
व्यालाःपुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनहिंसक पशु (सर्प, व्याघ्र आदि)
विकुर्वतेआत्मनेपद, लट्लकार, प्रथमपुरुष बहुवचनविकृत आचरण करते हैं, उपद्रव करते हैं
म्रियतेआत्मनेपद, लट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचनमरता है
बालःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनबालक
दम्पतिविरोधनम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनपति-पत्नी का विरोध, कलह

📜 व्याख्या एवं महत्त्व

यह श्लोक एक आदर्श राज्य के लक्षण बताता है। सीमा विवाद न होना – लोगों में लालच और झगड़े की प्रवृत्ति नहीं थी। हिंसक पशु उपद्रव न करना – यह दर्शाता है कि प्रकृति भी राजा के धर्मपालन से प्रभावित होकर शांत थी। बाल मृत्यु न होना – स्वास्थ्य सुविधाओं और संतुलित वातावरण का परिणाम। पति-पत्नी में विरोध न होना – पारिवारिक जीवन सुखद था।

यह सब राजा के धर्मपरायण शासन का प्रभाव है। जब राजा धर्म का पालन करता है, तो समाज और प्रकृति दोनों में सद्भाव होता है। यही रामराज्य की अवधारणा है।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

यह श्लोक बताता है कि बाहरी शांति आंतरिक शांति का प्रतिबिंब है। यदि राजा का मन शुद्ध और धर्मपरायण है, तो उसका प्रभाव सम्पूर्ण राज्य पर पड़ता है। व्यक्तिगत स्तर पर, हमें अपने आंतरिक राज्य (मन) को शुद्ध करना चाहिए, ताकि हमारे विचार और भावनाएँ (प्रजा) शांत रहें।

॥ न दम्पतिविरोधनम् ॥

जय श्री राम 🙏