संक्षेप रामायण – श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
हनूमान् दीप्यमानेन पुच्छेन नगरीं तदा । ददाह लङ्कां सबलां रावणस्य दिदृक्षया ॥
हिंदी अनुवाद
हनुमान् ने उस समय प्रज्वलित पूँछ से रावण की सम्पूर्ण सेना सहित लंका नगरी को जला दिया, मानो देखने की इच्छा से।
अर्थ / व्याख्या
हनुमान् ने प्रज्वलित पूँछ से लंका को जला दिया, मानो अपना पराक्रम दिखाने के लिए।
टिप्पणी
यह श्लोक लंका दहन की घटना का वर्णन करता है, जिससे हनुमान् ने रावण को चुनौती दी।
॥ श्लोक ४० – हनुमान् का लंका दहन ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : हनुमान् ने उस समय प्रज्वलित पूँछ से रावण की सम्पूर्ण सेना सहित लंका नगरी को जला दिया, मानो देखने की इच्छा से।
🔹 English Translation : Hanuman, with his blazing tail, then burnt the city of Lanka along with its forces, as if to show (his power).
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| हनूमान् | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | हनुमान् |
| दीप्यमानेन | शानच् प्रत्यय, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन (दीप् धातु) | प्रज्वलित (पूँछ से) |
| पुच्छेन | नपुंसकलिंग, तृतीया एकवचन | पूँछ से |
| नगरीम् | स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | नगरी |
| तदा | अव्यय | उस समय |
| ददाह | लिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (दह् धातु) | जला दिया |
| लङ्काम् | स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | लंका को |
| सबलाम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | सेना सहित |
| रावणस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | रावण की |
| दिदृक्षया | स्त्रीलिंग, तृतीया एकवचन (दिदृक्षा) | देखने की इच्छा से |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
हनुमान् ने जब देखा कि उनकी पूँछ में आग लगी है, तो उन्होंने अपने शरीर का आकार बढ़ा लिया और पूँछ से घर-घर में आग लगानी शुरू कर दी। सम्पूर्ण लंका जलकर राख हो गई। केवल विभीषण का घर ही बचा, क्योंकि हनुमान् जानते थे कि वे राम के भक्त हैं। इस घटना से रावण की सेना में भय व्याप्त हो गया, और लंका की शक्ति क्षीण हो गई। हनुमान् ने यह प्रदर्शित किया कि वे अकेले ही रावण का विनाश कर सकते हैं, किन्तु उन्होंने राम के लिए यह कार्य छोड़ दिया।
लंका दहन के बाद हनुमान् ने आग बुझा ली और वापस समुद्र पार कर गए। उन्होंने राम को सीता का समाचार दिया और लंका की स्थिति बताई। इससे राम का उत्साह बढ़ा और उन्होंने लंका पर चढ़ाई की तैयारी प्रारंभ कर दी।
आध्यात्मिक दृष्टि से, हनुमान् की प्रज्वलित पूँछ ज्ञानाग्नि का प्रतीक है, जो अज्ञान रूपी लंका (रावण के राज्य) को भस्म कर देती है।
॥ हनूमता लंका दग्धा सीताशोकनिवारिणा ॥
जय श्री राम 🙏