संक्षेप रामायण – श्लोक 97
संस्कृत श्लोक
दिवसे दिवसे यस्तु प्रथमं सर्गमुत्तमम् । पठेत् तस्य दिने पापं नश्यत्येव न संशयः ॥
हिंदी अनुवाद
जो प्रतिदिन इस उत्तम प्रथम सर्ग का पाठ करता है, उसके उस दिन का पाप नष्ट हो जाता है, इसमें संशय नहीं।
अर्थ / व्याख्या
प्रतिदिन प्रथम सर्ग पढ़ने से उस दिन का पाप नष्ट होता है।
टिप्पणी
यह श्लोक प्रतिदिन प्रथम सर्ग पढ़ने के फल का वर्णन करता है।
॥ श्लोक ९७ – प्रतिदिन प्रथम सर्ग पाठ से दैनिक पापनाश ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : जो प्रतिदिन इस उत्तम प्रथम सर्ग का पाठ करता है, उसके उस दिन का पाप नष्ट हो जाता है, इसमें संशय नहीं।
🔹 English Translation : He who reads this excellent first chapter day by day, his sin of that day perishes, there is no doubt.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| दिवसे दिवसे | अव्यय (पुनरुक्त) | प्रतिदिन |
| यः | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | जो |
| तु | अव्यय | तो |
| प्रथमम् | विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | प्रथम |
| सर्गम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | सर्ग का |
| उत्तमम् | विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | उत्तम |
| पठेत् | विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (पठ् धातु) | पढ़े |
| तस्य | सर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | उसके |
| दिने | पुल्लिंग, सप्तमी एकवचन | दिन का |
| पापम् | नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | पाप |
| नश्यति | लट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (नश् धातु) | नष्ट होता है |
| एव | अव्यय | ही |
| न | अव्यय | नहीं |
| संशयः | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | संशय |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
यह श्लोक दैनिक जीवन में प्रथम सर्ग के पाठ का महत्व बताता है। "दिवसे दिवसे" अर्थात् प्रतिदिन। जो व्यक्ति नित्य इस सर्ग का पाठ करता है, उसके उस दिन में किए गए सभी पाप (जाने-अनजाने में) नष्ट हो जाते हैं। यह एक अत्यन्त व्यावहारिक उपदेश है। मनुष्य से प्रतिदिन अनेक पाप होते हैं – जैसे झूठ बोलना, क्रोध करना, दूसरों को कष्ट देना आदि। इन पापों के प्रायश्चित के लिए प्रथम सर्ग का पाठ एक सरल उपाय है।
"न संशयः" कहकर इस फल की निश्चितता को बताया गया है। इसमें किसी प्रकार का संशय नहीं है, यह सत्य है।
आध्यात्मिक दृष्टि से, प्रतिदिन रामायण का पाठ करने से चित्त निर्मल होता है और पाप करने की प्रवृत्ति कम होती है।
॥ दैनिकं रामपाठेन पापं नश्यति तत्क्षणात् ॥
जय श्री राम 🙏