अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

चारैश्च परमोदारैः समन्तादन्ववेक्षिता। धर्मेण पालयामास प्रजाः परमया मुदा॥

हिंदी अनुवाद

उदार चरों (जासूसों) से सब ओर से देखी जाने वाली प्रजा को धर्मपूर्वक परम प्रसन्नता से पालन किया।

अर्थ / व्याख्या

राजा दशरथ उदार चरों के माध्यम से प्रजा की निगरानी करते थे और धर्मपूर्वक अत्यंत प्रसन्नता से उनका पालन करते थे।

टिप्पणी

यह श्लोक दशरथ के कुशल प्रशासन को दर्शाता है। चर (गुप्तचर) राज्य की सुरक्षा एवं व्यवस्था के लिए नियुक्त किए जाते थे, जो प्रजा की गतिविधियों पर नजर रखते थे। राजा धर्म का पालन करते हुए प्रसन्नतापूर्वक शासन करता था, जिससे प्रजा में असंतोष नहीं था।

श्लोक २१: प्रजापालन में चरों की भूमिका

चारैश्च परमोदारैः समन्तादन्ववेक्षिता।
धर्मेण पालयामास प्रजाः परमया मुदा॥
cāraiśca paramodāraiḥ samantādanvavekṣitā | dharmeṇa pālayāmāsa prajāḥ paramayā mudā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उदार चरों (जासूसों) से सब ओर से देखी जाने वाली प्रजा को धर्मपूर्वक परम प्रसन्नता से पालन किया।

🔹 English Translation : He protected the people, who were observed from all sides by extremely noble spies, with righteousness and great joy.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
चारैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनचरों (जासूसों) द्वारा
अव्ययऔर
परमोदारैःविशेषण, तृतीया बहुवचनअत्यन्त उदार
समन्तात्अव्ययसब ओर से
अन्ववेक्षितास्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनदेखी जाने वाली
धर्मेणपुल्लिंग, तृतीया एकवचनधर्म से, धर्मपूर्वक
पालयामासपरस्मैपद, लिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचनपालन किया
प्रजाःस्त्रीलिंग, द्वितीया बहुवचनप्रजा को
परमयाविशेषण, तृतीया एकवचनपरम, अत्यधिक
मुदास्त्रीलिंग, तृतीया एकवचनप्रसन्नता से

📜 व्याख्या एवं महत्त्व

इस श्लोक में राजा दशरथ के प्रशासन की एक महत्वपूर्ण विशेषता बताई गई है – चर (गुप्तचर) व्यवस्था। प्राचीन भारतीय राजनीति में चरों का अत्यधिक महत्व था। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी चरों के कर्तव्यों का विस्तार से वर्णन है। राजा स्वयं चरों के माध्यम से प्रजा की स्थिति जानता था और उसके अनुसार शासन करता था। यहाँ "परमोदारैः" विशेषण से यह भी संकेत मिलता है कि चर न केवल कुशल थे, बल्कि उदार एवं न्यायप्रिय भी थे, जिससे वे प्रजा के प्रति सहानुभूति रखते थे।

राजा धर्मेण (धर्म के अनुसार) प्रजापालन करता है – यह रामराज्य की मूल अवधारणा है। धर्म से शासन करने का अर्थ है प्रजा के कल्याण को सर्वोपरि रखना। राजा प्रसन्नता से (परमया मुदा) शासन करता है, जो दर्शाता है कि वह अपने कर्तव्यों को बोझ नहीं, वरन् आनन्द का साधन मानता था। ऐसे शासक के लिए प्रजा भी सुखी रहती है।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

यह श्लोक हमें सिखाता है कि किसी भी संगठन या परिवार के संचालन में उचित निगरानी आवश्यक है। चर बाहरी निगरानी के प्रतीक हैं, परन्तु आंतरिक स्तर पर हमें अपने मन और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए। धर्म से कार्य करना और प्रसन्न रहना सफल जीवन के सूत्र हैं। राजा दशरथ का उदाहरण हमें प्रेरित करता है कि हम अपने दायित्वों को धर्मपूर्वक और उत्साह से निभाएँ।

॥ धर्मेण पालयामास प्रजाः परमया मुदा ॥

जय श्री राम 🙏