अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

एतैरेव गुणैर्युक्तैः सचिवैः स महीपतिः। शशास पृथिवीं सर्वामिन्द्रो देवगणैरिव॥

हिंदी अनुवाद

उन्हीं गुणों से युक्त मंत्रियों के साथ उस महीपति ने सम्पूर्ण पृथ्वी का शासन किया, जैसे इन्द्र देवगणों के साथ।

अर्थ / व्याख्या

दशरथ ने अपने योग्य मंत्रियों के साथ सम्पूर्ण पृथ्वी पर शासन किया, जैसे इन्द्र देवताओं के साथ स्वर्ग का शासन करते हैं।

टिप्पणी

यह श्लोक दशरथ के मंत्रिमंडल की योग्यता को दर्शाता है। मंत्री भी राजा के समान गुणों से युक्त थे, जिससे शासन सुचारु रूप से चलता था।

श्लोक २५: योग्य मंत्रियों सहित शासन

एतैरेव गुणैर्युक्तैः सचिवैः स महीपतिः।
शशास पृथिवीं सर्वामिन्द्रो देवगणैरिव॥
etaireva guṇairyuktaiḥ sacivaiḥ sa mahīpatiḥ | śaśāsa pṛthivīṃ sarvāmindro devagaṇairiva ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उन्हीं गुणों से युक्त मंत्रियों के साथ उस महीपति ने सम्पूर्ण पृथ्वी का शासन किया, जैसे इन्द्र देवगणों के साथ।

🔹 English Translation : With ministers endowed with the same virtues, that lord of the earth ruled the entire earth, like Indra with the hosts of gods.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
एतैःसर्वनाम, तृतीया बहुवचनइन (गुणों) से
एवअव्ययही
गुणैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनगुणों से
युक्तैःविशेषण, तृतीया बहुवचनयुक्त
सचिवैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनमंत्रियों के साथ
सःसर्वनाम, प्रथमा एकवचनवह
महीपतिःप्रथमा एकवचनराजा
शशासलिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचनशासन किया
पृथिवीम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनपृथ्वी को
सर्वाम्विशेषण, द्वितीया एकवचनसम्पूर्ण
इन्द्रःप्रथमा एकवचनइन्द्र
देवगणैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनदेवताओं के समूह के साथ
इवअव्ययजैसे

📜 व्याख्या एवं महत्त्व

इस श्लोक में दशरथ के शासन की एक और विशेषता बताई गई है – उनके मंत्री भी राजा के समान गुणसम्पन्न थे। "एतैरेव गुणैः" का अर्थ है कि जो गुण दशरथ में थे – तेज, बल, उदारता, धर्मपरायणता – वे सभी मंत्रियों में भी विद्यमान थे। यह एक आदर्श प्रशासन का लक्षण है कि राजा के सहायक भी उतने ही योग्य हों।

पुनः इन्द्र की उपमा दी गई है – जैसे इन्द्र देवताओं की सहायता से तीनों लोकों का शासन करते हैं, वैसे ही दशरथ योग्य मंत्रियों के सहयोग से पृथ्वी का शासन करते थे। यह सामूहिक नेतृत्व का आदर्श है।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

यह श्लोक हमें सिखाता है कि किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक करने के लिए योग्य सहयोगियों की आवश्यकता होती है। राजा स्वयं चाहे कितना भी योग्य हो, यदि उसके मंत्री अयोग्य हों, तो शासन सुचारु नहीं चल सकता। आध्यात्मिक जीवन में भी हमें सत्संग और योग्य गुरु की आवश्यकता होती है।

॥ शशास पृथिवीं सर्वामिन्द्रो देवगणैरिव ॥

जय श्री राम 🙏