अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
मन्त्रगुप्तौ समर्थास्ते सूक्ष्मेष्वपि निदर्शनाः। विदिताश्चैव धर्मज्ञाः प्रियवादश्च सर्वदा॥
हिंदी अनुवाद
वे मंत्रणा की गोपनीयता में समर्थ थे, सूक्ष्म विषयों में भी उदाहरण स्वरूप थे, धर्मज्ञ थे और सदा प्रिय वचन बोलने वाले थे।
अर्थ / व्याख्या
मंत्री गोपनीयता रखने में सक्षम, सूक्ष्मज्ञ, धर्मज्ञ और मृदुभाषी थे।
टिप्पणी
यह श्लोक मंत्रियों के चार अतिरिक्त गुणों का वर्णन करता है।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड, सर्ग ७, श्लोक १९ ॥
विदिताश्चैव धर्मज्ञाः प्रियवादश्च सर्वदा॥
viditāścaiva dharmajñāḥ priyavādaśca sarvadā ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : वे मंत्रणा की गोपनीयता में समर्थ थे, सूक्ष्म विषयों में भी उदाहरण स्वरूप थे, धर्मज्ञ थे और सदा प्रिय वचन बोलने वाले थे।
🔹 English Translation : They were capable of keeping counsel secret, were exemplars even in subtle matters, were knowers of dharma, and always spoke pleasant words.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| मन्त्रगुप्तौ | स्त्रीलिंग, सप्तमी एकवचन (मन्त्र + गुप्ति) | मंत्रणा की गोपनीयता में |
| समर्थाः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचन | समर्थ |
| ते | सर्वनाम, प्रथमा बहुवचन | वे |
| सूक्ष्मेषु | विशेषण, नपुंसकलिंग, सप्तमी बहुवचन | सूक्ष्म विषयों में |
| अपि | अव्यय | भी |
| निदर्शनाः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचन | उदाहरण स्वरूप |
| विदिताः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचन | जाने जाने वाले |
| च | अव्यय | और |
| एव | अव्यय | ही |
| धर्मज्ञाः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचन (धर्म + ज्ञ) | धर्म के ज्ञाता |
| प्रियवादाः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचन (प्रिय + वाद) | प्रिय वचन बोलने वाले |
| च | अव्यय | और |
| सर्वदा | अव्यय | सदा |
📜 व्याख्या
यह श्लोक मंत्रियों के चार विशिष्ट गुणों को उजागर करता है। प्रथम, वे मंत्रणा की गोपनीयता रखने में समर्थ थे – राजकाज के रहस्यों को कभी बाहर नहीं आने देते थे। द्वितीय, वे सूक्ष्म से सूक्ष्म विषयों में भी आदर्श (उदाहरण) थे, अर्थात् उनकी बुद्धि अत्यंत सूक्ष्म थी। तृतीय, वे धर्मज्ञ थे – धर्म के जानकार थे। चतुर्थ, वे सदा प्रिय वचन बोलते थे, अर्थात् वाणी में मधुरता थी। ये गुण एक आदर्श मंत्री के लिए आवश्यक माने गए हैं।
॥ गोपनीयता, सूक्ष्मदृष्टि, धर्मज्ञता और मधुर वाणी – मंत्री के लक्षण ॥
जय श्री राम 🙏