अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
सम्प्रेक्ष्य धर्मलाभाभ्यां धर्मेणैव द्विजोत्तमान्। पालयन्ति च पौरांश्च राजशास्त्रानुसारिणः॥
हिंदी अनुवाद
वे धर्म और लाभ दोनों को देखते हुए, धर्म से ही द्विजोत्तमों (ब्राह्मणों) की रक्षा करते थे, और राजशास्त्र के अनुसार चलने वाले नगरवासियों की भी रक्षा करते थे।
अर्थ / व्याख्या
मंत्री धर्म और अर्थ दोनों का ध्यान रखते हुए, धर्मपूर्वक ब्राह्मणों और नगरवासियों की रक्षा करते थे।
टिप्पणी
यह श्लोक मंत्रियों के नैतिक कर्तव्य को दर्शाता है।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड, सर्ग ७, श्लोक १८ ॥
पालयन्ति च पौरांश्च राजशास्त्रानुसारिणः॥
pālayanti ca paurāṃśca rājaśāstrānusāriṇaḥ ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : वे धर्म और लाभ दोनों को देखते हुए, धर्म से ही द्विजोत्तमों (ब्राह्मणों) की रक्षा करते थे, और राजशास्त्र के अनुसार चलने वाले नगरवासियों की भी रक्षा करते थे।
🔹 English Translation : Considering both righteousness and profit, they protected the best of the twice-born (Brahmins) by righteousness alone, and also protected the citizens who followed the royal edicts.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| सम्प्रेक्ष्य | ल्यबंत अव्यय | देखकर, विचार करके |
| धर्मलाभाभ्याम् | पुल्लिंग, द्वितीया द्विवचन (धर्म + लाभ) | धर्म और लाभ दोनों का |
| धर्मेण | पुल्लिंग, तृतीया एकवचन | धर्म से |
| एव | अव्यय | ही |
| द्विजोत्तमान् | पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचन (द्विज + उत्तम) | द्विजोत्तमों (ब्राह्मणों) को |
| पालयन्ति | क्रिया, लट् लकार, प्रथमपुरुष बहुवचन | पालन करते हैं, रक्षा करते हैं |
| च | अव्यय | और |
| पौरान् | पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचन | नगरवासियों को |
| च | अव्यय | और |
| राजशास्त्रानुसारिणः | विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचन (राजशास्त्र + अनुसारिन्) | राजशास्त्र का अनुसरण करने वालों को |
📜 व्याख्या
इस श्लोक में मंत्रियों के कर्तव्य का दार्शनिक पक्ष दिखाया गया है। वे धर्म (नैतिकता) और लाभ (राज्यहित) दोनों को ध्यान में रखते थे, परंतु ब्राह्मणों की रक्षा वे धर्म से ही करते थे, अर्थात् धर्म को प्राथमिकता देते थे। साथ ही, वे उन नगरवासियों की भी रक्षा करते थे जो राजशास्त्र के अनुसार चलते थे। यहाँ "राजशास्त्रानुसारिणः" से तात्पर्य उन नागरिकों से है जो राजा के नियमों का पालन करते थे। इस प्रकार मंत्री धर्म और राजनीति का समन्वय करते हुए सबका हित साधते थे।
॥ धर्म और अर्थ का समन्वय ही कुशल प्रशासन का मूल है ॥
जय श्री राम 🙏