अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

क्वचिन्न दुष्टस्तत्रासीत् परदाररतिर्नरः। प्रशान्तं सर्वमेवासीद् राष्ट्रं पुरवरं च तत्॥

हिंदी अनुवाद

उस राज्य में कहीं भी दुष्ट या पराई स्त्री में रत मनुष्य नहीं था। वह राज्य और उत्तम नगर (अयोध्या) सर्वथा शांत था।

अर्थ / व्याख्या

राज्य में दुष्ट और व्यभिचारी का अभाव था; सर्वत्र शांति थी।

टिप्पणी

यह श्लोक राज्य में नैतिकता और शांति का चित्रण करता है।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड, सर्ग ७, श्लोक १५ ॥

क्वचिन्न दुष्टस्तत्रासीत् परदाररतिर्नरः।
प्रशान्तं सर्वमेवासीद् राष्ट्रं पुरवरं च तत्॥
kvacin na duṣṭastatrāsīt paradāraratir naraḥ |
praśāntaṃ sarvamevāsīd rāṣṭraṃ puravaraṃ ca tat ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उस राज्य में कहीं भी दुष्ट या पराई स्त्री में रत मनुष्य नहीं था। वह राज्य और उत्तम नगर (अयोध्या) सर्वथा शांत था।

🔹 English Translation : In that kingdom, there was no wicked man or one addicted to another's wife anywhere. That kingdom and the excellent city (Ayodhya) were completely peaceful.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
क्वचित्अव्ययकहीं भी
अव्ययनहीं
दुष्टःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनदुष्ट
तत्रअव्ययवहाँ
आसीत्क्रिया, लङ् लकार, प्रथमपुरुष एकवचनथा
परदाररतिःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (पर + दार + रति)पराई स्त्री में अनुरक्त
नरःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमनुष्य
प्रशान्तम्विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनशांत
सर्वम्सर्वनाम, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनसब
एवअव्ययही
आसीत्क्रिया, लङ् लकार, प्रथमपुरुष एकवचनथा
राष्ट्रम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनराज्य
पुरवरम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन (पुर + वर)उत्तम नगर
अव्ययऔर
तत्सर्वनाम, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनवह

📜 व्याख्या

इस श्लोक में वाल्मीकि जी ने अयोध्या राज्य की नैतिक उत्कृष्टता का वर्णन किया है। वहाँ कोई दुष्ट व्यक्ति नहीं था, न ही कोई परस्त्रीगामी। यह सामाजिक सदाचार का सूचक है। परिणामस्वरूप, सम्पूर्ण राज्य और अयोध्या नगर शांत था। "प्रशान्तम्" शब्द से तात्पर्य है कि कहीं कोई अशांति, अपराध या संघर्ष नहीं था। यह आदर्श समाज का चित्रण है जहाँ धर्म का पालन होता है और सब सुखी हैं।

॥ सदाचार ही शांति का आधार है ॥

जय श्री राम 🙏