अयोध्या का प्रशासन – श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
शुचीनामेकबुद्धीनां सर्वेषां सम्प्रजानताम्। नासीत्पुरे वा राष्ट्रे वा मृषावादी नरः क्वचित्॥
हिंदी अनुवाद
उन पवित्र, एकमत, सब कुछ जानने वाले (मंत्रियों) के रहते नगर में या राज्य में कहीं भी झूठ बोलने वाला मनुष्य नहीं था।
अर्थ / व्याख्या
मंत्रियों की पवित्रता, एकता और ज्ञान के कारण राज्य में झूठ बोलने वाला कोई नहीं था।
टिप्पणी
यह श्लोक सज्जन प्रशासन के प्रभाव को दर्शाता है।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड, सर्ग ७, श्लोक १४ ॥
नासीत्पुरे वा राष्ट्रे वा मृषावादी नरः क्वचित्॥
nāsīt pure vā rāṣṭre vā mṛṣāvādī naraḥ kvacit ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : उन पवित्र, एकमत, सब कुछ जानने वाले (मंत्रियों) के रहते नगर में या राज्य में कहीं भी झूठ बोलने वाला मनुष्य नहीं था।
🔹 English Translation : When these pure, unanimous, and wise ministers were there, there was no liar anywhere in the city or the kingdom.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| शुचीनाम् | विशेषण, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचन | पवित्र लोगों के |
| एकबुद्धीनाम् | विशेषण, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचन | एकमत (समान बुद्धि) वालों के |
| सर्वेषाम् | सर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचन | सबके |
| सम्प्रजानताम् | विशेषण, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचन | सम्यक् प्रकार से जानने वालों के |
| नासीत् | क्रिया, लङ् लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (न + आसीत्) | नहीं था |
| पुरे | नपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचन | नगर में |
| वा | अव्यय | या |
| राष्ट्रे | नपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचन | राज्य में |
| वा | अव्यय | या |
| मृषावादी | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | झूठ बोलने वाला |
| नरः | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | मनुष्य |
| क्वचित् | अव्यय | कहीं भी |
📜 व्याख्या
यह श्लोक बताता है कि जब मंत्री स्वयं पवित्र, एकमत और सर्वज्ञ होते हैं, तो उनके प्रभाव से सम्पूर्ण राज्य में सत्य का वातावरण बन जाता है। "शुचीनाम्" से तात्पर्य है कि वे आचरण से शुद्ध थे। "एकबुद्धीनाम्" का अर्थ है कि उनमें मतैक्य था, कोई मतभेद नहीं। "सम्प्रजानताम्" का अर्थ है कि वे सब कुछ भली-भाँति जानते थे, अतः कोई उन्हें धोखा नहीं दे सकता था। ऐसे प्रशासन में झूठ बोलने वाले का कोई स्थान नहीं था। यह आदर्श स्थिति दर्शाती है कि यदि शासक वर्ग सद्गुणी हो तो प्रजा भी सद्गुणी बनती है।
॥ सत्य का राज्य वहीं, जहाँ शासक स्वयं सत्यनिष्ठ हों ॥
जय श्री राम 🙏