संस्कृत श्लोक

ताभ्यां ददौ तदा हृष्टः कुठारमपरो मुनिः। काषायमपरो वस्त्रं चीरमन्यो ददौ मुनिः॥

हिंदी अनुवाद

तब किसी हर्षित मुनि ने उन दोनों को कुठार (कुल्हाड़ी) दिया, किसी अन्य ने काषाय वस्त्र (भगवा वस्त्र) और किसी दूसरे मुनि ने चीर (वल्कल) दिया।

अर्थ / व्याख्या

इस श्लोक में कुछ और मुनियों द्वारा दिए गए उपहारों का वर्णन है – कुठार (कुल्हाड़ी), काषाय वस्त्र (भगवा वस्त्र) तथा चीर (वल्कल)। कुठार यज्ञ के लिए समिधा काटने या आश्रम की व्यवस्था हेतु उपयोगी था। काषाय वस्त्र त्याग और संन्यास का प्रतीक है, तो चीर (वल्कल) वनवासियों का साधारण वस्त्र।

टिप्पणी

इस श्लोक में दिए गए उपहार यज्ञ एवं वन-जीवन के लिए अत्यन्त उपयोगी हैं। कुठार (कुल्हाड़ी) से समिधा (लकड़ियाँ) काटी जाती हैं, जो यज्ञ में आहुति के लिए आवश्यक हैं। काषाय वस्त्र (भगवा वस्त्र) संन्यास एवं त्याग का प्रतीक है, जो राम के वनगमन के समय उनके भाव से मेल खाता है। चीर (वल्कल) वही वस्त्र है जो राम एवं लक्ष्मण ने वनवास के आरम्भ में धारण किया था। यह श्लोक संकेत करता है कि मुनि राम-लक्ष्मण के भावी जीवन को जानते थे, अतः उन्हें वे सभी वस्तुएँ दे रहे थे जो वन में काम आएँगी।

॥ बालकाण्ड सर्ग ४ श्लोक २४ – कुठार, काषाय वस्त्र एवं चीर ॥

ताभ्यां ददौ तदा हृष्टः कुठारमपरो मुनिः।
काषायमपरो वस्त्रं चीरमन्यो ददौ मुनिः॥
tābhyāṃ dadau tadā hṛṣṭaḥ kuṭhāram aparo muniḥ |
kāṣāyam aparo vastraṃ cīram anyo dadau muniḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तब किसी हर्षित मुनि ने उन दोनों को कुठार (कुल्हाड़ी) दिया, किसी अन्य ने काषाय वस्त्र (भगवा वस्त्र) और किसी दूसरे मुनि ने चीर (वल्कल) दिया।

🔹 English Translation : Then a delighted sage gave them an axe (kuṭhāra), another gave ochre-coloured robes (kāṣāya vastra), and yet another sage gave bark garments (cīra).

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ताभ्याम्सर्वनाम, चतुर्थी द्विवचनउन दोनों को
ददौलिट् लकार, प्रथमपुरुष एकवचनदिया
तदाअव्ययतब
हृष्टःभूतकालिक कृदन्त (हृष् धातु)हर्षित / प्रसन्न
कुठारम्पुल्लिङ्ग, द्वितीया एकवचनकुल्हाड़ी
अपरःविशेषण, पुल्लिङ्ग प्रथमा एकवचनदूसरे
मुनिःपुल्लिङ्ग प्रथमा एकवचनमुनि ने
काषायम्विशेषण, नपुंसकलिङ्ग द्वितीया एकवचनभगवा / कषाय रंग का
अपरःपुल्लिङ्ग प्रथमा एकवचनदूसरे ने
वस्त्रम्नपुंसकलिङ्ग द्वितीया एकवचनवस्त्र
चीरम्नपुंसकलिङ्ग द्वितीया एकवचनवल्कल / चीर वस्त्र
अन्यःपुल्लिङ्ग प्रथमा एकवचनकिसी अन्य
ददौलिट् लकारदिया
मुनिःपुल्लिङ्ग प्रथमा एकवचनमुनि ने

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

इस श्लोक में वर्णित कुठार (कुल्हाड़ी) यज्ञीय समिधा एकत्र करने का प्रमुख उपकरण था। यह केवल एक औजार नहीं, बल्कि साधक के कर्तव्य-पालन का साधन था। काषाय वस्त्र भगवा रंग का होता है, जो त्याग, वैराग्य एवं संन्यास का प्रतीक है। यह रंग अग्नि के समान तेजस्वी माना जाता है। चीर (वल्कल) वृक्ष की छाल से निर्मित वस्त्र है, जो अत्यंत सादा एवं टिकाऊ होता है।

ये तीनों वस्तुएँ राम के वनवास जीवन की ओर संकेत करती हैं। राम ने वन जाते समय काषाय वस्त्र एवं चीर धारण किया था, और समिधा एकत्र करने के लिए कुठार का प्रयोग किया था। मुनियों का यह दान मानो भविष्य की तैयारी थी।

✨ विशेष तथ्य: काषाय वस्त्र को 'कषाय' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है राग-द्वेष से रहित। यह रंग गेरुआ होता है, जो सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय आकाश में दिखाई देता है – यह अनित्यता का भी बोध कराता है। चीर वल्कल को भारतीय परम्परा में अत्यन्त पवित्र एवं तापस-योग्य वस्त्र माना गया है।

📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक विश्लेषण

इस श्लोक में तीन उपहारों को तीन भिन्न वाक्यों में रखा गया है, किन्तु क्रिया 'ददौ' सभी के साथ सम्बद्ध है। प्रथम चरण में 'हृष्टः' विशेषण मुनि के हर्ष को दर्शाता है। द्वितीय चरण में 'काषायम्' विशेषण है, जो 'वस्त्रम्' की विशेषता बताता है। तृतीय चरण में 'चीरम्' स्वतंत्र रूप में प्रयुक्त है।

श्लोक में 'अपरः' एवं 'अन्यः' का प्रयोग पर्यायवाची के रूप में हुआ है, जो मुनियों की अनेकता को दर्शाता है। यहाँ सभी मुनि हर्षित हैं, इसलिए 'हृष्टः' शब्द केवल प्रथम के साथ आया है, किन्तु भाव से सभी हर्षित हैं।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

कुठार (कुल्हाड़ी) – यह संकल्प शक्ति का प्रतीक है। जैसे कुल्हाड़ी काटकर रास्ता बनाती है, वैसे ही साधक अपने संकल्प से संसार के बंधनों को काटता है। काषाय वस्त्र – यह रंग हमें याद दिलाता है कि शरीर नश्वर है, अतः मोह-माया से ऊपर उठना चाहिए। चीर (वल्कल) – यह सादगी एवं प्रकृति के समीप रहने का प्रतीक है।

राम-लक्ष्मण को ये वस्तुएँ प्राप्त होना यह दर्शाता है कि वे सांसारिक सुखों से विरक्त होकर धर्म-पालन हेतु तत्पर थे। यह श्लोक हमें सिखाता है कि जीवन में त्याग, संयम एवं सादगी का महत्व क्या है।

॥ काषायवस्त्रधारी यः स एव मुनिसत्तमः ॥

जय श्री राम 🙏