राम की कहानी – श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

स्त्रीतृतीयेन च तथा यत् प्राप्तं चरता वने । सत्यसन्धेन रामेण तत् सर्वं चान्ववैक्षत ॥

हिंदी अनुवाद

और इसी प्रकार (उन्होंने) उस सत्यसन्ध राम के द्वारा, जो दो स्त्रियों (सीता और लक्ष्मण?) के साथ वन में विचरण करते हुए जो कुछ प्राप्त किया गया (अनुभव किया), उस सबका भी अनुवीक्षण किया (ध्यान से देखा)।

अर्थ / व्याख्या

इस श्लोक में वाल्मीकि वनवास के दौरान राम, सीता और लक्ष्मण द्वारा अनुभव की गई समस्त घटनाओं का साक्षात्कार करते हैं।

टिप्पणी

पाँचवें श्लोक में वाल्मीकि राम के वनगमन एवं वनवास के दृश्यों को देखते हैं। "स्त्रीतृतीयेन" का अर्थ है दो स्त्रियों के साथ? यहाँ संदर्भ है राम के साथ सीता और लक्ष्मण। लक्ष्मण को भी स्त्रीवाचक शब्द से क्यों संबोधित किया? वस्तुतः यहाँ "स्त्रीतृतीयेन" का तात्पर्य है "जिसके साथ दो स्त्रियाँ हैं" – सीता और लक्ष्मण (लक्ष्मण को स्त्रीवत् समझा गया है क्योंकि वे राम की सेवा में सदा साथ रहते थे? या यह एक विशेषण है जो बताता है कि राम के साथ तीन लोग थे – राम स्वयं और दो अन्य (सीता और लक्ष्मण)। कुछ टीकाओं में "स्त्रीतृतीय" का अर्थ "स्त्री के रूप में तीसरा" अर्थात् लक्ष्मण जो राम की पत्नी की भाँति सेवा में तत्पर थे, ऐसा भी व्याख्यायित किया गया है।

॥ श्रीमद्वाल्मीकियरामायणे बालकाण्डे तृतीयः सर्गः श्लोक ५ ॥

स्त्रीतृतीयेन च तथा यत् प्राप्तं चरता वने ।
सत्यसन्धेन रामेण तत् सर्वं चान्ववैक्षत ॥
strītṛtīyena ca tathā yat prāptaṃ caratā vane |
satyasandhena rāmeṇa tat sarvaṃ cānvavaikṣata ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : और इसी प्रकार (उन्होंने) उस सत्यसन्ध राम के द्वारा, जो दो स्त्रियों (सीता और लक्ष्मण?) के साथ वन में विचरण करते हुए जो कुछ प्राप्त किया गया (अनुभव किया), उस सबका भी अनुवीक्षण किया (ध्यान से देखा)।

🔹 English Translation : And also, he (Valmiki) observed all that was attained (experienced) by truth-pledged Rama, while wandering in the forest along with the two (Sita and Lakshmana).

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
स्त्रीतृतीयेनविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन (स्त्री+तृतीय)दो स्त्रियों के साथ (स्त्री-तृतीय = जिसके साथ दो स्त्रियाँ हों); अर्थात् सीता और लक्ष्मण के साथ
अव्ययऔर
तथाअव्ययउसी प्रकार
यत्सर्वनाम, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनजो कुछ
प्राप्तम्क्रिया (भूतकालिक कृदंत)प्राप्त किया गया, अनुभव किया गया
चरतावर्तमान कृदंत, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन (चर् धातु)विचरण करते हुए
वनेनपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचनवन में
सत्यसन्धेनविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन (सत्य+सन्ध)सत्यप्रतिज्ञ, सत्य का पालन करने वाले
रामेणपुल्लिंग, तृतीया एकवचनराम के द्वारा
तत्सर्वनाम, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनउसको
सर्वम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनसब कुछ
अव्ययऔर
अन्ववैक्षतक्रिया, प्रथमपुरुष एकवचन (अनु+अव+ईक्ष्)अनुवीक्षण किया, पीछे-पीछे देखा, ध्यान से देखा

📜 श्लोक का सन्दर्भ एवं व्याख्या

इस श्लोक में वाल्मीकि वनवास प्रसंग का साक्षात्कार करते हैं। "स्त्रीतृतीयेन" पद की व्याख्या विवादास्पद है। प्रायः इसका अर्थ लिया जाता है – राम के साथ दो स्त्रियाँ (सीता और लक्ष्मण) थीं। लक्ष्मण को स्त्री कहना असंगत है, अतः कुछ विद्वान इसे "तीसरे के रूप में स्त्री" अर्थात् सीता के रूप में एक स्त्री और लक्ष्मण के रूप में दूसरा, ऐसा समझते हैं। वास्तव में यहाँ "स्त्रीतृतीय" का अर्थ है "जिसके साथ तीन लोग हैं – स्वयं और दो अन्य (जिनमें एक स्त्री है)"। इस प्रकार राम, सीता और लक्ष्मण – ये तीनों वन में थे। वाल्मीकि ने उनके वनवास के समस्त अनुभवों को देखा।

"सत्यसन्धेन" विशेषण राम की मूल विशेषता को दर्शाता है – वे सत्य की प्रतिज्ञा का पालन करने वाले हैं, जिसके कारण उन्होंने वनवास स्वीकार किया। वाल्मीकि ने उनके उस कठोर वनवास के दृश्यों का भी साक्षात् अनुभव किया।

✨ विशेष तथ्य: "स्त्रीतृतीय" की व्याख्या में एक मत यह भी है कि लक्ष्मण राम के प्रति ऐसी सेवा भाव रखते थे मानो वे उनकी पत्नी हों। यह उनके अटूट प्रेम और समर्पण को दर्शाता है।

📖 आध्यात्मिक संदेश

इस श्लोक से हमें राम के सत्यसन्ध स्वभाव की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने पिता के वचन की रक्षा के लिए सुख-सुविधाओं का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। वाल्मीकि ने उस त्याग और तपस्या को देखा। यह हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर चलने के लिए कठिनाइयाँ आती हैं, लेकिन उनका साक्षी होना भी एक दिव्य अनुभूति है।

॥ सत्यसन्धस्य रामस्य वनवासः ॥

जय श्री राम 🙏