संक्षेप रामायण – श्लोक 99

संस्कृत श्लोक

आयुः कीर्तिं यशश्चैव धनं धान्यं सुतान् पशून् । प्रयच्छति नरेन्द्रस्य प्रथमसर्गकीर्तनात् ॥

हिंदी अनुवाद

प्रथम सर्ग के कीर्तन से राजाओं को आयु, कीर्ति, यश, धन, धान्य, पुत्र और पशु प्राप्त होते हैं।

अर्थ / व्याख्या

प्रथम सर्ग के कीर्तन से राजाओं को आयु, कीर्ति, यश, धन, धान्य, पुत्र और पशु मिलते हैं।

टिप्पणी

यह श्लोक प्रथम सर्ग के कीर्तन से होने वाले भौतिक लाभों का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ९९ – प्रथम सर्ग कीर्तन से आयु, कीर्ति, धन आदि की प्राप्ति ॥

आयुः कीर्तिं यशश्चैव धनं धान्यं सुतान् पशून् । प्रयच्छति नरेन्द्रस्य प्रथमसर्गकीर्तनात् ॥
āyuḥ kīrtiṃ yaśaścaiva dhanaṃ dhānyaṃ sutān paśūn | prayacchati narendrasya prathamasargakīrtanāt ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : प्रथम सर्ग के कीर्तन से राजाओं को आयु, कीर्ति, यश, धन, धान्य, पुत्र और पशु प्राप्त होते हैं।

🔹 English Translation : From the recitation of the first chapter, kings obtain long life, fame, glory, wealth, grain, sons, and cattle.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
आयुःनपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनआयु
कीर्तिम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनकीर्ति
यशःनपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनयश
अव्ययऔर
एवअव्ययही
धनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनधन
धान्यम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनधान्य
सुतान्पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचनपुत्र
पशून्पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचनपशु
प्रयच्छतिलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + यम्)प्रदान करता है
नरेन्द्रस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनराजाओं को
प्रथमसर्गकीर्तनात्पुल्लिंग, पञ्चमी एकवचनप्रथम सर्ग के कीर्तन से

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक श्लोक ६५ के समान है, किन्तु यहाँ विशेष रूप से "प्रथमसर्गकीर्तनात्" कहकर प्रथम सर्ग के कीर्तन से ये फल मिलने की बात कही गई है। यह प्रथम सर्ग की महिमा को पुनः दोहराता है।

आयु (दीर्घायु), कीर्ति (प्रसिद्धि), यश (सम्मान), धन (सम्पत्ति), धान्य (अन्न), सुत (पुत्र) और पशु (गाय आदि) – ये सभी प्राचीन भारतीय समाज में समृद्धि के मापदण्ड थे। प्रथम सर्ग का कीर्तन इन सबको प्रदान करता है। यह श्लोक विशेष रूप से राजाओं (नरेन्द्र) के लिए कहा गया है, किन्तु सामान्य जन के लिए भी यही फल है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, ये सभी भौतिक सुख राम की कृपा से मिलते हैं, और प्रथम सर्ग का कीर्तन राम को प्रसन्न करने का सरल उपाय है।

॥ प्रथमसर्गकीर्तनात् सर्वसम्पत्करं नृणाम् ॥

जय श्री राम 🙏